Thursday, June 21, 2012

sandhya's bio data n application

डॉ. संध्या 'राज' मेहता ( जैन )
आदर्श राज  बंगलो ,नीलकंठ टॉवर
मैकडोनाल्ड के पास ,कानकिया रोड , मीरारोड
दिनांक - ................

सेवा में,
श्रीमान संचालक महोदय ,
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( विषय -सभी कक्षाओं में हिंदी एवं माध्यमिक स्तर के सभी विषयों  के अध्यापन हेतु आवेदन -पत्र )

महोदय ,
            सविनय निवेदन है कि आपकी शिक्षण संस्था में कक्षा ६ठी  से १०  वीं  में हिंदी विषय एवं ६ ठी से  ८ वीं तक सभी विषयों के अध्यापन हेतु मैं आवेदन करना चाहती हूँ । शिक्षण के दौरान हिंदी विषय अतिप्रिय होने से हिंदी भाषा पर अच्छा अधिकार है ।
            मैं महाराष्ट्र बोर्ड ,सी.बी.एस.इ. ,आई.सी.एस.इ.किसी भी बोर्ड के हिंदी विषय तथा ६ ठी से ८ वीं तक सभी विषय पढ़ाने की पात्रता रखती हूँ। यदि आपने अध्यापन का अवसर प्रदान किया तो मैं अपनी योग्यता,लगन और परिश्रम से विद्ध्यार्थियों को श्रेष्ठ परीक्षा-परिणाम प्रदान करने का भरसक प्रयास करूंगी।
            आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है ,आप अवसर प्रदान कर अनुग्रहीत करेंगे। धन्यवाद।

मेरी सम्पूर्ण जानकारी,कार्यानुभव एवं शैक्षणिक योग्यता प्रमाणपत्रों के साथ संलग्न है।

भवदीया-


डॉ. संध्या 'राज' मेहता

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 नाम -      डॉ.  संध्या 'राज ' मेहता  ( जैन )      [ बी. ए. (हिंदी साहित्य) ,  एम. ए. (अर्थशास्त्र) , एन.डी. एस. सी. ]   संपर्क सूत्र -    9029208468,022 - 28113780
पति का नाम -   श्री राजेंद्र एच. मेहता    [ एफ.सी.ए., डीसा ] 
संपर्क सूत्र  - 9820457430,28110344
ऑफिस  का पता -  सी -62/101/से - 5, शांतिनगर ,मीरारोड 
 घर का पता - आदर्श राज  बंगलो ,नीलकंठ टॉवर
मैकडोनाल्ड के पास ,कानकिया रोड , मीरारोड
जन्म दिनांक - 26, जून ,1965 
मातृभाषा व  शिक्षण माध्यम - हिंदी 
अन्य भाषा ज्ञान -गुजराती ,मराठी, इंग्लिश
एच. एस. सी.-1981, उत्तीर्ण -प्रथम श्रेणी 
बी. ए.(हिंदी साहित्य )-1984, उत्तीर्ण- प्रथम  श्रेणी 
एम. ए.(अर्थशास्त्र )- 1986, उत्तीर्ण- प्रथम  श्रेणी (प्रावीण्य सूची में नवम स्थान )
एम. ए. (हिंदी साहित्य ,पूर्वार्ध )- 1987, (सम्पूर्ण तैयारी के बावजूद किसी कारणवश परीक्षा
                                                                                  नहीं दी।)
पी. एच. डी.- 1988-90 (म. प्र. दुग्ध संघ -उपलब्धियाँ ,लाभ- हानि एवं  विकास की सम्भावनाएँ )
                                           (विवाहोपरांत कार्यक्षेत्र उज्जैन होने से स्थगित )  
डॉ.ऑफ़ नेचरोपेथी साइंस(एन.डी.एस.सी.) -1995-96 (विशेष योग्यता के साथ उत्तीर्ण)
अन्य गतिविधियाँ - 
  1. विद्यालय में दो वर्ष (1979,1980) - एथेलेटिक्स चेम्पियन । 
  2. राज्य स्तरीय शालेय  क्रीड़ा  प्रतियोगिता में  खेलने का गौरव प्राप्त । 
  3. मीरा-भायंदर महिला शतरंज प्रतियोगिता में द्वितीय स्थान प्राप्त ।  
  4. विद्यालय ,महाविद्यालय  में निबंध,भाषण,वाद -विवाद प्रतियोगिता में  पुरस्कृत । 
  5. भायदास नाट्यगृह विलेपार्ले ,भक्तिवेदांत सभागृह मीरारोड, गोपालजी की हवेली मीरारोड में सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन। 
  6. समाचार पत्रों , पत्रिकाओं एवं ब्लॉग में लेख, कविता  इत्यादि लेखन कार्य । 
  7. आई.सी.आई.सी.आई.लाइफ इंश्योरेंस  एडवाइजर परीक्षा, बी.एस. इ., एन.एस. इ.,कमोडिटीज मार्केट  शेयर ब्रोकरेज  परीक्षा उत्तीर्ण ।

कार्यानुभव - 
  1. मदर इंडिया इंग्लिश स्कूल नागदा जंक्शन ,म.प्र.,शिक्षिका एवं परीक्षा मंत्री के पद पर 3 वर्ष कार्य ।
  2. जैन क्लासेस मीरारोड में कक्षा 8वीं ,9वीं ,10 वीं में हिंदी विषय का 3वर्ष अध्यापन कार्य ।
  3. संध्याज वर्कशाप मीरारोड में हिंदी ट्यूशन,हिंदी- इंग्लिश सुन्दर लेखन, फोनिक्स शिक्षण, योगा शिक्षण  इत्यादि का 7 वर्ष कार्य ।
  4. शिखर इंटरनेशनल स्कूल मीरारोड में 2 वर्ष हिंदी विषय एवं १ वर्ष गणित विषय का अध्यापन ।
  5. गुरुकुल कोचिंग क्लासेस भायंदर में सी बी एस इ, आई सी एस  इ के विद्यार्थियों को 1 वर्ष हिन्दी विषय का अध्यापन ।

Monday, May 14, 2012

दीक्षार्थी बहन चंदा एवं जीजाजी को सादर समर्पित

दीक्षा-दिन 24/5/12,गुरूवार दीक्षार्थी बहन चंदा एवं जीजाजी को सादर समर्पित 
 संध्या 'राज' मेहता ,मीरारोड 

17/5/12 ,  गुरूवार
स्निग्ध, सौम्य, सरल, शीतल, तन से कोमल 
  नम्र, शिष्ट, पुनीत, कर्मठ, मन से अति निर्मल ।
क्षमा - सरिता,दया- सागर , ममता की मूरत विरल  
कैसे बयां करूँ ? चंदा बहन की छवि अति उज्जवल  ।
माता सुभद्रा बेन ने पाल - पोस संस्कारों से सुसज्जित किया,
पिता हस्तीमलजी मेहता  ने पढ़ा -लिखा बेशुमार लाड लड़ाया ।
बहन लाडकुंवर, जसकुंवर ,तरुलता संग खेली -कूदी, बचपन बिताया,
भाई सतीश और राजेंद्र ने मौज मस्ती संग दुलार दिया ।
बचपन बीता, आई जवानी ,हीरालालजी गोखरू संग ब्याह हुआ,
श्वसुर केसरीमलजी गोखरू ने पिता की कमी का न अहसास दिया।
सास सोहनबाई ने बड़े परिवार की जिम्मेदारी में होशियार किया,    
सास -श्वसुर सेवा ,पारिवारिक दायित्वों संग जीवन -अमृत पिया। 
अनुपमा,  राजकुमार, विजय ,भावना में मातृत्व रंग साकार हुआ ,
पोते -पोती, दोहते -दोहिति संग जीवन का हर नाता जिया।
धर्म की लगन बचपन से जगी,दिन- दुनी, रात - चौगुनी बढ़ी ,
विशालता व् समृद्धता में भी  यह अगन बुझाए न बुझी।
 पति हीरालालजी सद्गृहस्थ, विशाल हृदयी, समतामयी,कर्मठ व्यापारी ,
कबड्डी ,बेसबाल  खिलाड़ी ,अग्रज थे खेल जगत में भारी ।
सच्चा पति- धर्म निभाया, पत्नी- इच्छा शिरोधारी।
हंसी-खुशी दीक्षा -आज्ञा दी,जागी धर्म-भावना कल्याणकारी,
संयम पथ पर चंदाबेन बढे,आज्ञा देकर आप  बने परम उपकारी।
वाद-विवाद संग  आलोचना -प्रत्यालोचना के कई बाण चले ,
वृद्धावस्था ,अस्वस्थता की परवाह नहीं, मन में बस वैराग्य पले।
 प्रण था चंदा बहन के आत्मोन्नति पथ में बाधा न डले , 
हीरालालजी अब उनके अनुरूप स्व को ढाल चले ।
आप दोनों अविरत धर्म- ध्यान के अनुरागी बने ,
किंचित रंज नहीं, लेश मात्र भी न प्रमाद से सने ।
 धन्य- धन्य हैं चारों मात - पिता पुण्यशाली घने ,

श्रृद्धा सुमन अर्पित उन्हें,जिनने ये ललना-लाल जने। 
मुख पर आपके न आई कभी विषाद रेखा ,
आपमें सबल -अटल -विरल व्यक्तित्व देखा।
बहन के मुक्तिपथ में सहभागी आप बने अनूठे,
हम नासमझों की समझ से कई गुना ऊपर उठे । 
आपका जीवन हमारा पथप्रदर्शन, विचार मंथन करता रहे ,
दो कूलों को दीपाकर,मस्तक ऊँचा करने वाले,तुम्हें नमन करें।
बहन हमारी आपका मायके में आना,
भाभियों के संग बहन बेटी जैसा बरताना,
कभी नन्द सा अहसास न दिलाना ,
हर पल काम में हाथ बटाना, 
सबकी चिंता, सबका ध्यान कराना ,
सहज नहीं है यह सब, आसान नहीं भूलाना ।
याद बहुत आओगी ,मिलने को मन न तरसाना ,
विनती है,ममता माया मोह छूटा ,दिव्य दृष्टी बरसाना ।
अपना आशीष हम पर सदा बनाना ,
मोह से बंधे हम नादानों की गलती सब बिसराना।
भूल चूक हमारी सारी माफ़ करना, 
मोक्ष मार्ग पर सदा आगे ही आगे बढ़ना।
जब -जब आपकी मुखरित वाणी ,सुविचार याद आएंगे ,
पलकों को क्षण भर भीना कर जाएंगे।
धर्म की राह में जो ज्योत जलाई ,उसे बुझने नहीं देंगे ,
आपकी मधुर स्मृति सहज,सरल, सौम्य व्यवहार याद कर जायेंगे,
भीगी पलकों को ढाढस दे ,आपके पदचिन्हों से सीख पाएंगे ,
शायद  कुछ सुकृत्य कर जीवन सफल बनायेंगे ।
भावों की अभिव्यक्ति बहुत है भारी, आप दूरदृष्टा ,दूरगामी हो,
है हमारी कामना अरू सदभावना आपकी कीर्ति अजर अमर अविकारी हो । 
आपकी कीर्ति अजर -अमर- अविकारी हो । 
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prakrutik najaare -kudarat kee den

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