दीक्षा-दिन 24/5/12,गुरूवार दीक्षार्थी बहन चंदा एवं जीजाजी को सादर समर्पित
स्निग्ध, सौम्य, सरल, शीतल, तन से कोमल
नम्र, शिष्ट, पुनीत, कर्मठ, मन से अति निर्मल ।
कैसे बयां करूँ ? चंदा बहन की छवि अति उज्जवल ।
माता सुभद्रा बेन ने पाल - पोस संस्कारों से सुसज्जित किया,
पिता हस्तीमलजी मेहता ने पढ़ा -लिखा बेशुमार लाड लड़ाया ।
बहन लाडकुंवर, जसकुंवर ,तरुलता संग खेली -कूदी, बचपन बिताया,
भाई सतीश और राजेंद्र ने मौज मस्ती संग दुलार दिया ।
बचपन बीता, आई जवानी ,हीरालालजी गोखरू संग ब्याह हुआ,
श्वसुर केसरीमलजी गोखरू ने पिता की कमी का न अहसास दिया।
सास सोहनबाई ने बड़े परिवार की जिम्मेदारी में होशियार किया,
श्वसुर केसरीमलजी गोखरू ने पिता की कमी का न अहसास दिया।
सास सोहनबाई ने बड़े परिवार की जिम्मेदारी में होशियार किया,
सास -श्वसुर सेवा ,पारिवारिक दायित्वों संग जीवन -अमृत पिया।
अनुपमा, राजकुमार, विजय ,भावना में मातृत्व रंग साकार हुआ ,
पोते -पोती, दोहते -दोहिति संग जीवन का हर नाता जिया।
धर्म की लगन बचपन से जगी,दिन- दुनी, रात - चौगुनी बढ़ी ,
विशालता व् समृद्धता में भी यह अगन बुझाए न बुझी।
पति हीरालालजी सद्गृहस्थ, विशाल हृदयी, समतामयी,कर्मठ व्यापारी ,
कबड्डी ,बेसबाल खिलाड़ी ,अग्रज थे खेल जगत में भारी ।
सच्चा पति- धर्म निभाया, पत्नी- इच्छा शिरोधारी।
हंसी-खुशी दीक्षा -आज्ञा दी,जागी धर्म-भावना कल्याणकारी,
श्रृद्धा सुमन अर्पित उन्हें,जिनने ये ललना-लाल जने।
मुख पर आपके न आई कभी विषाद रेखा ,आपमें सबल -अटल -विरल व्यक्तित्व देखा।
बहन के मुक्तिपथ में सहभागी आप बने अनूठे,
हम नासमझों की समझ से कई गुना ऊपर उठे ।
आपका जीवन हमारा पथप्रदर्शन, विचार मंथन करता रहे ,
दो कूलों को दीपाकर,मस्तक ऊँचा करने वाले,तुम्हें नमन करें।
बहन हमारी आपका मायके में आना,
भाभियों के संग बहन बेटी जैसा बरताना,
कभी नन्द सा अहसास न दिलाना ,
हर पल काम में हाथ बटाना,
सबकी चिंता, सबका ध्यान कराना ,
सहज नहीं है यह सब, आसान नहीं भूलाना ।
याद बहुत आओगी ,मिलने को मन न तरसाना ,
विनती है,ममता माया मोह छूटा ,दिव्य दृष्टी बरसाना ।
अपना आशीष हम पर सदा बनाना ,
मोह से बंधे हम नादानों की गलती सब बिसराना।
भूल चूक हमारी सारी माफ़ करना,
मोक्ष मार्ग पर सदा आगे ही आगे बढ़ना।
जब -जब आपकी मुखरित वाणी ,सुविचार याद आएंगे ,पलकों को क्षण भर भीना कर जाएंगे।
धर्म की राह में जो ज्योत जलाई ,उसे बुझने नहीं देंगे ,
आपकी मधुर स्मृति सहज,सरल, सौम्य व्यवहार याद कर जायेंगे,
भीगी पलकों को ढाढस दे ,आपके पदचिन्हों से सीख पाएंगे ,
शायद कुछ सुकृत्य कर जीवन सफल बनायेंगे ।
भावों की अभिव्यक्ति बहुत है भारी, आप दूरदृष्टा ,दूरगामी हो,है हमारी कामना अरू सदभावना आपकी कीर्ति अजर अमर अविकारी हो ।
आपकी कीर्ति अजर -अमर- अविकारी हो ।

