Saturday, June 20, 2020

उलझी जिंदगी

मन थक गया सहते सहते
जिस्म थक गया कहते कहते,
धाराएं बहती रहीं नदियों की तरह ,
 जाने कब समंदर ने आगोश में ले लिया।

वक्त बेवक्त के मंजर हैं ये
कभी जिलाते , कभी जलाते हैं ये
आंधियो से जो नहीं डरते  ,
कभी हवा के झोंके से बह जाते हैं।

 शायद माजरा भयंकर रहा होगा ,
तकलीफ भी अनन्त सही होगी ,
 कुछ चूक कहीं  हुई होगी,
बरसों की मेहनत
यूं नहीं धराशायी हुई होगी।

चाहे जो हो,आत्महत्या सी
भूल न कोई करना।
ईश्वर की अमानत  है जीवन
 इसे उसी की धरोहर समझना।
उपयोगी है जीवन
सदुपयोग इसका करना।


सुख दुख नियति के खेल,
इनमें समन्वय कर धैर्य रखना।
 प्रकृति से हार- जीत व्यर्थ
 जीवन है कीमती
सदा ध्यान इसका रखना।