सिसकती,शाम, सलगती रात
सिसकती, दहकती ,सलगती सी शाम है।
डरी- डरी, सहमी -सहमी सी रात है।
कभी डरी -डरी, सहमी -सहमी सी शाम है।
धधकती ,दहकती ,सलगती सी रात है।
मौसम का मिजाज बदलना आम है।
जिन्दगी अब तक पूरी जिसके नाम है ।
साथ न हो उसका, हर मौसम नाकाम है।
चाहे शाम हो, चाहे रात हो ।
चाहे चंदा सी सौगात हो,
चाहे तारों की बारात हो,
नजारों में चाहे उन्माद हो
जब हमसफ़र न साथ हो
जब हमसफ़र न साथ हो
मन की वीरानगी ही अंजाम है,
उम्मीद तो बस केवल नाम है।
उम्मीद तो बस केवल नाम है।