जीवन का मूल्य पहचानो "
प्यारे बच्चों ,
गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय त्यौहार बधाइयों और शुभकामनाओं के आदान -प्रदान के साथ प्रतिवर्ष यह याद दिलाकर जाता है कि यह देश तुम्हारा है, तुम इसकी धरोहर हो, इसका सुनहरा भविष्य तुम ही हो |
आज बच्चों ने आत्महत्या का जटिल प्रश्न देश के सामने खड़ा कर दिया है देश के महान शहीदों ने अपना जीवन बलिदान कर तुम्हें स्वतंत्र भारत का उपहार दिया व तुम्हें अपनी थाती सौंपी। अब तुम्हें अपना कर्तव्य निभाना है,न कि व्यर्थ जीवन गवांकर देश की धरोहर का अंत कर दो | तुम्हें यह अधिकार किसने दिया ?
आज बच्चों ने आत्महत्या का जटिल प्रश्न देश के सामने खड़ा कर दिया है देश के महान शहीदों ने अपना जीवन बलिदान कर तुम्हें स्वतंत्र भारत का उपहार दिया व तुम्हें अपनी थाती सौंपी। अब तुम्हें अपना कर्तव्य निभाना है,न कि व्यर्थ जीवन गवांकर देश की धरोहर का अंत कर दो | तुम्हें यह अधिकार किसने दिया ?
देश के भावी युग-निर्माता विद्यार्थियों ने आत्महत्या का जो सिलसिला शुरू किया है उसे बस अब यहीं रोकना है |यह जीवन जीने को भले ही तुम्हारा है पर इस पर जितना अधिकार तुम्हारा है ,उतना ही तुम्हारी जननी यानि माता और भारत माता का भी है |
"जो भरा नहीं भावों से
बहती जिसमें रसधार नहीं,
वह ह्रदय नहीं पत्थर है
जिसे स्वदेश से प्यार नहीं |"
साथ ही आज के सन्दर्भ में यही कहूंगी --
"वह ह्रदय नहीं पत्थर है
जिसे स्वयं से प्यार नहीं |"
उम्र के जिस पड़ाव पर बच्चों ने आत्महत्याएं कीं ,वहां तक कितनी ही मुसीबतें झेलकर माता -पिता ने उन्हें पाल -पोसकर बड़ा किया होगा |बीमार होने पर कितने ही देवी - देवताओं की मन्नत रखी होगी,कितने डॉक्टरों से इलाज करवाया होगा |उनके जीवन के अंत के बाद माता -पिता की आँखों के अश्रु सुखने का नाम न लेते होंगे , कौन बनेगा उनका संबल?कैसे मिलेगी उन्हें सांत्वना?
क्या इन प्रश्नों के उत्तर किसी के पास है ?जो इन प्रश्नों
पर गौर करेगा ,वह शायद कल्पना में भी आत्महत्या का विचार नहीं करेगा |
आत्महत्या करने वाले अधिकतर बच्चे मध्यम वर्ग से हैं | अतः एक कारण यह भी नजर आता है कि निम्न वर्ग को अपने श्रम यानि हाथों की ताकत पर भरोसा है व उच्च वर्ग को अपने धन यानि पूंजी की ताकत पर | माध्यम वर्ग के बच्चे दोनों में अपने आपको गौण पाते हैं| बस यही कमजोरी उन्हें हताश व निराश करती है,परन्तु आत्महत्या समस्या का समाधान नहीं |
धार्मिक मतावलंबियों के अनुसार फिर उन्हें पुनर्जन्म लेना है, फिर पढाई करना हैऔर नए सिरे से यहाँ तक पहुँचने के लिए संघर्ष करना है|फिर भला यह मार्ग क्यों चुनें?यह कायर लोगों का मार्ग है| वीरता का इतिहास रचने वाले भारत देश के सपूतों को यह कर्म शोभा नहीं देता |तुममें तो इतनी शक्ति है कि -
धार्मिक मतावलंबियों के अनुसार फिर उन्हें पुनर्जन्म लेना है, फिर पढाई करना हैऔर नए सिरे से यहाँ तक पहुँचने के लिए संघर्ष करना है|फिर भला यह मार्ग क्यों चुनें?यह कायर लोगों का मार्ग है| वीरता का इतिहास रचने वाले भारत देश के सपूतों को यह कर्म शोभा नहीं देता |तुममें तो इतनी शक्ति है कि -
"अगर तुम ठान लो तो
तारे गगन के तोड़ सकते हो ,
अगर तुम ठान लो तो
रुख हवा का मोड़ सकते हो|"
अतः दृढ़ संकल्प और विश्वास की आवश्यकता है|परीक्षा तो क्या जीवन के हर कठिन समय में संयम,लगन और साहस तुम्हारा संबल बनेगा |
फिल्मों को देखकर यदि आज की युवा पीढ़ी गलत राह पर चल निकलती है और एक बच्चे की नक़ल दूसरे बच्चे भी करने लगे तो यह सरासर गलत है |
हर सिक्के के दो पहलू होते हैं| हमें हर बार उजला पहलू ही देखना है | चाकू का प्रयोग स्वादिष्ट फलों के रसास्वादन के लिए भी होता है और उसी चाकू से किसी की ह्त्या भी की जा सकती है | यह तो उसके प्रयोग करने वाले पर निर्भर है कि वह उसका सदुपयोग करे या दुरुपयोग |
जिन फ़िल्मी कलाकारों को बच्चे पसंद करते हैं ,उनके बारे में सोचें तो जैसा कि चित्रलेखा के जनवरी के तृतीय अंक में बताया है,दीपिका पादुकोण,केटरीना कैफ ,करीना कपूर व अक्षय खन्ना आदि भी ज्यादा शिक्षित नहीं हैं | स्नातक न होते हुए भी इन्होंने कला ,मेहनत और लगन से अपनी मंजिल प्राप्त की |
उच्च शिक्षा जीवन में बहुत महत्व रखती है ,लेकिन जीवन से बढकर तो कुछ नहीं | यदि हमारा चरित्र और ध्येय उज्जवल है तो मंजिल पाने से कोई नहीं रोक सकता |
प्रिय बच्चों ,यदि जीवन में थोड़ी भी निराशा है तो उसे निकाल दो और हिम्मत,लगन,धैर्य व अपने बाहुबल परआत्मविश्वास के साथ पुनः प्रयास करें |
किसी ने सच कहा है -"यदि हम गलत दिशा में बहुत दूर निकल गए हैं, तब भी सही दिशा में जाने के लिए हमें उतना ही नहीं चलना है, बस पलटना भर है और हम सही दिशा में होंगे|"
फिल्मों को देखकर यदि आज की युवा पीढ़ी गलत राह पर चल निकलती है और एक बच्चे की नक़ल दूसरे बच्चे भी करने लगे तो यह सरासर गलत है |
हर सिक्के के दो पहलू होते हैं| हमें हर बार उजला पहलू ही देखना है | चाकू का प्रयोग स्वादिष्ट फलों के रसास्वादन के लिए भी होता है और उसी चाकू से किसी की ह्त्या भी की जा सकती है | यह तो उसके प्रयोग करने वाले पर निर्भर है कि वह उसका सदुपयोग करे या दुरुपयोग |
जिन फ़िल्मी कलाकारों को बच्चे पसंद करते हैं ,उनके बारे में सोचें तो जैसा कि चित्रलेखा के जनवरी के तृतीय अंक में बताया है,दीपिका पादुकोण,केटरीना कैफ ,करीना कपूर व अक्षय खन्ना आदि भी ज्यादा शिक्षित नहीं हैं | स्नातक न होते हुए भी इन्होंने कला ,मेहनत और लगन से अपनी मंजिल प्राप्त की |
उच्च शिक्षा जीवन में बहुत महत्व रखती है ,लेकिन जीवन से बढकर तो कुछ नहीं | यदि हमारा चरित्र और ध्येय उज्जवल है तो मंजिल पाने से कोई नहीं रोक सकता |
प्रिय बच्चों ,यदि जीवन में थोड़ी भी निराशा है तो उसे निकाल दो और हिम्मत,लगन,धैर्य व अपने बाहुबल परआत्मविश्वास के साथ पुनः प्रयास करें |
किसी ने सच कहा है -"यदि हम गलत दिशा में बहुत दूर निकल गए हैं, तब भी सही दिशा में जाने के लिए हमें उतना ही नहीं चलना है, बस पलटना भर है और हम सही दिशा में होंगे|"
इस ज्वलंत समस्या के समाधान के लिए बच्चों, माता-पिता ,शिक्षक एवं शिक्षा विभाग सभी को मिले-जुले प्रयास करने होंगे |
- माता-पिता को यथासमय बच्चों की पढ़ाई का निरीक्षण करना होगा | उनकी समस्याओं को सुनना एवं उनका हल निकालना होगा | कुछ समस्याएँ केवल सुनाने से ही दिल से निकल जाती हैं वरना दर्द बनकर नासूर बनते देर नहीं लगती |
प्रत्येक बच्चे को पढाई के साथ- साथ किसी एक खेल व कला में निपुण होना होगा | पढाई में कमजोर होने पर विशेष रूप से इस बात का ध्यान रखना होगा | पढाई के साथ जीवन में योगा व मेडिटेशन (ध्यान ) का नियमित अभ्यास करें तो यह समस्या उपस्थित ही नहीं होगी |
परीक्षा- प्रश्नपत्रों के बीच एक -दो दिन अवकाश रखने से यदि समस्या का हल संभव हो तो शिक्षा विभाग को
इस ओर अतिशीघ्र ध्यान देना चाहिए |
ईश्वर की अदभूत रचना से घृणा कर जीवन - ज्योत बुझाने की उल्टी गंगा बहाना घोर पाप है | अतः इस नवयुग में उमंग व उल्लास के साथ सुखद नवीन विचारों से सबके जीवन में अपनी मुस्कान से रोशनी भर दो |
"बिखेरो तुम नई मुस्कान
फिर जग में नया सवेरा हो
घृणा का पाप धोकर
घृणा का पाप धोकर
स्नेह धारा में नहाओ तुम,
नए युग में विचारों की
नई गंगा बहाओ तुम |"
भारत के वीरों ने सिंह की तरह दहाड़कर अंग्रेजों को भगाया था |भगत सिंह ,रामसिंह ,फतेहसिंह आदि नामों में 'सिंह' शब्द वीरता का ही प्रतीक है | ऐसे वीरों के देश में निराशा की भावना पनपना व जीवन गंवाना सियार की तरह समस्या से डरकर भागना है |
" जागो फिर एक बार
सिंहों की माँदों में
आया है एक सियार
जागो फिर एक बार |"
हमारा राष्ट्रीय त्यौहार गणतंत्र दिवस मनाना व देश के शहीदों को श्रद्धांजली देना तभी सार्थक होगा , जब हम यह प्रण करें कि हम उनकी कुर्बानी को व्यर्थ न जाने देंगे | उन्हीं की तरह वीर बनकर हर समस्या का मुंहतोड़ जवाब देंगे | देश की रक्षा की जो जवाबदारी हमें सौंपी है, उसका निर्वाह करेंगे | यों जीवन से हताश - निराश होकर अपनी जननी और जन्मभूमि को कभी लज्जित नहीं करेंगे | माँ एवं मातृभूमि के कर्ज चुकाने की शपथ के साथ -
जय भारत ,जय महाराष्ट्र |
- डॉ संध्या 'राज' मेहता
मीरा रोड (ठाणे)
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