तेरे नैन ऐसे नशीले ,
तेरे होंठ ऐसे रसीले ,
उस पर तेरे कपडे भड़कीले
फिर क्यों कोई तुझे न छेड़े
तेरा यह मदमस्त आकर्षण
देता है कितनों को मौन आमंत्रण|
तेरी आँखों में कितनी बार वह प्यार देखने का साहस किया ,
तेरे गुस्से की दहशत ने हर बार निराश किया|
दिल के दर्द कभी बाहर आने की जुर्रत न करना,
हर बार आकर तुने तूफान को जन्म दिया|
No comments:
Post a Comment