शेयर बाज़ार -कंपनी के लाभ की गिनती कैसे होती है|
कंपनी प्रतिवर्ष अपने हिसाब की जाँच करवाकर अपने शेयर होल्डर्स को
ओडिटर्स की रिपोर्ट के साथ यह हिसाब प्रतिवर्ष भेजती है| यह हिसाब शेयर होल्डर्स द्वारा मंजूर करवाना पड़ता है|इसलिए हिसाब के साथ कंपनी वार्षिक साधारण सभा (AGM) भी बुलाती है ,उसमें प्रत्येक शेयर होल्डर्स को प्रत्यक्ष हाजिर होने का हक़ है|यदि शेयर होल्डर स्वयं हाजिर न हो सके तो उसे अपनी तरफ से किसी अन्य व्यक्ति को साधारण सभा में भेजने का हक़ है|इसके लिए उसे प्रोक्सी फार्म भरकर भेजना पड़ता है ,प्रोक्सी फार्म में जिस व्यक्ति का नाम दिया जाता है वह वार्षिक साधारण सभा में हाजिर रह सकता है|
वार्षिक साधारण सभा में कंपनी स्वयं के ओडिटर्स की नियुक्ति को घोषित करना, कंपनी द्वारा जारी किए गए डिविडेंड को शेयर होल्डर्स द्वारा मंजूर करवाना ,कंपनी के डायरेक्टर्स की नियुक्ति करना,कंपनी का हिसाब शेयर होल्डर्स द्वारा मंजूर करवाना इत्यादि कार्य किए जाते हैं|इसके अलावा पहले से मंजूरी लेकर शेयर होल्डर्स स्वयं के प्रश्नों के जवाब प्राप्त कर सकते हैं|
कंपनी स्वयं के माल के उत्पादन और विक्रय में से जो आय प्राप्त करती है उसके सामने उसे माल खरीदी और उत्पादन करने के लिए खर्च करने करना पड़ता है| कंपनी की ऑफिस चलाने के लिए भी खर्च करना पड़ता है|कुल आय में से कुल खर्च घटाने पर कंपनी ने कितना लाभ किया है यह जाना जा सकता है|इस लाभ को प्राफिट बिफोर इंटरेस्ट, डेप्रिसिएशन,और टेक्स (PBIDT) कहा जाता है|इस लाभ में से ब्याज और घिसावट खर्च को कम किया जाय तब जो लाभ बचता है उसे प्रोफिट बिफोर टेक्स (PBT) कहा जाता है|इस लाभ में से कंपनी को जो टेक्स भरना पड़ता है उसे कं किया जाए तब बचे हुए लाभ को प्रोफिट आफ्टर टेक्स(PAT) कहा जाता है|ये टेक्स इस कंपनी द्वारा अनिवार्यतः भरा जाने वाला कर है|
कंपनी ने गए वर्ष की तुलना में इस वर्ष प्रोफिट आफ्टर टेक्स जितना बढाया हो उतनी कंपनी की वृद्धि दर गिनी जाती है|यदि एक कंपनी ने गए वर्ष एक करोड़ प्रोफिट ऑफ्टर टेक्स किया हो और इस वर्ष एक करोड़ बीस लाख करे तो कंपनी की वृद्धि दर २०% गिनी जाती है |यदि कंपनी का घसारा, ब्याज और कर कम करने से पहले का लाभ (PBIDT) भी गए वर्ष की तुलना में बढ़ा हो तो उसके दो कारण हो सकते हैं|१.-कंपनी का विक्रय बढ़ा हो |२.-कंपनी पिछले वर्ष जिस दर से लाभ अर्जित करती थी ,उस लाभ दर में वृद्धि हुई हो|उदाहरणार्थ -यदि एक कंपनी के पिछले वर्ष का लाभ उसके विक्रय का ३०% है और पिछले वर्ष का विक्रय ५ करोड़ है तो इस कंपनी का लाभ (PBIDT)डेढ़ करोड़ गिना जाता है|यदि कंपनी इस वर्ष भी ३०%लाभ उसके विक्रय पर करे और विक्रय यदि 8 करोड़ हो तो लाभ २.४ करोड़ होगा|यदि विक्रय गए वर्ष जितना ५ करोड़ही है तो लाभ डेढ़ करोड़ ही होगा| किन्तु यदि कंपनी लाभ की दर ३०% से बढाकर ४०% करती है तो विक्रय ५ करोड़ होने पर भी लाभ २ करोड़ होगा जो पिछले वर्ष से ५० लाख रूपए बढ़ जाएगा| इसका कारण कंपनी ने अपने लाभ की दर बढ़ाई है| कंपनी की विक्रय के ऊपर इस दर को ऑपरेटिंग प्रोफिट मार्जिन (OPM) कहा जाता है| ऑपरेटिंग प्रोफिट मार्जिन (OPM)की तुलना करने से कौनसी कंपनी ज्यादा कुशल है ,यह जाना जा सकता है|जिस कंपनी का (OPM) बढ़ाया जाता है,उसका विक्रय बढ़ते ही उसका (PBIDT) दूसरी कंपनी की तुलना में शीघ्रता से बढेगा|यदि दूसरी सभी बातों में कंपनी एक सामान हो तो निवेशक दोनों कंपनी में से जिस कंपनी ने (OPM) लाभ दर बढ़ाई है, उसके शेयर को ज्यादा भाव देने को तैयार होगा|
वार्षिक साधारण सभा में कंपनी स्वयं के ओडिटर्स की नियुक्ति को घोषित करना, कंपनी द्वारा जारी किए गए डिविडेंड को शेयर होल्डर्स द्वारा मंजूर करवाना ,कंपनी के डायरेक्टर्स की नियुक्ति करना,कंपनी का हिसाब शेयर होल्डर्स द्वारा मंजूर करवाना इत्यादि कार्य किए जाते हैं|इसके अलावा पहले से मंजूरी लेकर शेयर होल्डर्स स्वयं के प्रश्नों के जवाब प्राप्त कर सकते हैं|
कंपनी स्वयं के माल के उत्पादन और विक्रय में से जो आय प्राप्त करती है उसके सामने उसे माल खरीदी और उत्पादन करने के लिए खर्च करने करना पड़ता है| कंपनी की ऑफिस चलाने के लिए भी खर्च करना पड़ता है|कुल आय में से कुल खर्च घटाने पर कंपनी ने कितना लाभ किया है यह जाना जा सकता है|इस लाभ को प्राफिट बिफोर इंटरेस्ट, डेप्रिसिएशन,और टेक्स (PBIDT) कहा जाता है|इस लाभ में से ब्याज और घिसावट खर्च को कम किया जाय तब जो लाभ बचता है उसे प्रोफिट बिफोर टेक्स (PBT) कहा जाता है|इस लाभ में से कंपनी को जो टेक्स भरना पड़ता है उसे कं किया जाए तब बचे हुए लाभ को प्रोफिट आफ्टर टेक्स(PAT) कहा जाता है|ये टेक्स इस कंपनी द्वारा अनिवार्यतः भरा जाने वाला कर है|
कंपनी ने गए वर्ष की तुलना में इस वर्ष प्रोफिट आफ्टर टेक्स जितना बढाया हो उतनी कंपनी की वृद्धि दर गिनी जाती है|यदि एक कंपनी ने गए वर्ष एक करोड़ प्रोफिट ऑफ्टर टेक्स किया हो और इस वर्ष एक करोड़ बीस लाख करे तो कंपनी की वृद्धि दर २०% गिनी जाती है |यदि कंपनी का घसारा, ब्याज और कर कम करने से पहले का लाभ (PBIDT) भी गए वर्ष की तुलना में बढ़ा हो तो उसके दो कारण हो सकते हैं|१.-कंपनी का विक्रय बढ़ा हो |२.-कंपनी पिछले वर्ष जिस दर से लाभ अर्जित करती थी ,उस लाभ दर में वृद्धि हुई हो|उदाहरणार्थ -यदि एक कंपनी के पिछले वर्ष का लाभ उसके विक्रय का ३०% है और पिछले वर्ष का विक्रय ५ करोड़ है तो इस कंपनी का लाभ (PBIDT)डेढ़ करोड़ गिना जाता है|यदि कंपनी इस वर्ष भी ३०%लाभ उसके विक्रय पर करे और विक्रय यदि 8 करोड़ हो तो लाभ २.४ करोड़ होगा|यदि विक्रय गए वर्ष जितना ५ करोड़ही है तो लाभ डेढ़ करोड़ ही होगा| किन्तु यदि कंपनी लाभ की दर ३०% से बढाकर ४०% करती है तो विक्रय ५ करोड़ होने पर भी लाभ २ करोड़ होगा जो पिछले वर्ष से ५० लाख रूपए बढ़ जाएगा| इसका कारण कंपनी ने अपने लाभ की दर बढ़ाई है| कंपनी की विक्रय के ऊपर इस दर को ऑपरेटिंग प्रोफिट मार्जिन (OPM) कहा जाता है| ऑपरेटिंग प्रोफिट मार्जिन (OPM)की तुलना करने से कौनसी कंपनी ज्यादा कुशल है ,यह जाना जा सकता है|जिस कंपनी का (OPM) बढ़ाया जाता है,उसका विक्रय बढ़ते ही उसका (PBIDT) दूसरी कंपनी की तुलना में शीघ्रता से बढेगा|यदि दूसरी सभी बातों में कंपनी एक सामान हो तो निवेशक दोनों कंपनी में से जिस कंपनी ने (OPM) लाभ दर बढ़ाई है, उसके शेयर को ज्यादा भाव देने को तैयार होगा|
कंपनी स्वयं के मूल व्यवसाय के अलावा दूसरी प्रवृत्तियों में से भी लाभ अर्जित कर सकता है|जैसे की कंपनी स्वयं की कोई जमीन बेचकर लाभ करती है कंपनी की बढ़ी हुई आय (OTHER INCOME) मानी जाती है|कंपनी स्वयं की खरीदी उत्पादन और विक्रय की मूल प्रवृति के अलावा जो कोई आय करती है वह (OTHER INCOME) में अपने आप शामिल हो जाती है| OPM की गिनती करते समय इस अतिरिक्त आय को ध्यान में नहीं रखा जाता है|विक्रय के उत्पादन में कार्यरत कंपनी यदि स्वयं के निवेश पर ब्याज अर्जित करती है तो वह भी कंपनी की OTHER INCOME गिनी जाती है|इस OTHER INCOME को ज्यादा महत्व इसलिए नहीं दिया जाता है क्योंकि यह कभी भी बंद हो सकती है| उदाहरणार्थ जो कंपनी स्वयं के ब्याज पर रखे हुए निवेश को यदि उठा लेती है और उसे स्वयं के धंधे में एक नया निवेश करती है तो उसकी ब्याज की आय बंद हो जाती है|
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