डॉ संध्या 'राज' मेहता
बर्बाद ए गुलिस्तां करने को हर शाख पर उल्लू बैठा है।
जागो नगरवासियों ,जागो नगरसेवकों।
जिस प्रकार प्राचीन समय में भारत सोने की चिड़िया कहा जाता था ,लेकिन मुगलों ,मंगोलों ,अंग्रेजों ,मोहम्मद गजनवी जैसे विदेशियों ने इसे लूट-लूट कर खोखला कर डाला। यही किस्सा मीरा-भायंदर नगरपालिका का है , यह नगरपालिका आज पूरे मुंबई या यों कहिए कि महाराष्ट्र की धनाड्य नगरपालिका की श्रेणी में आती है,ऐसी सोने की चिड़िया पर सबकी नजरें गड़ी हुई है । अतः नगरसेवकों से निवेदन है कि अपनी सेवा नगर को अर्पित करने का पाँच वर्ष का जो स्वर्णिम समय उन्हें मिला है ,वे उसका सदुपयोग करें । आपसी वैमनस्य व एक दूसरे की टाँग खींचने में अपना कीमती समय नष्ट न करें। केवल वाह-वाही लूटने व दिखावे के लिए पोस्टर लगवाने में जनता की अमूल्य संपत्ति नष्ट न करेँ । सभी नगरसेवक यदि ठान लें तो वे इस विशाल सुनियोजित नगर को सुन्दर ,वैभवी व शालीन नगरी की संज्ञा दिलवा सकते हैं।
अगर तुम ठान लो तो तारे गगन के तोड़ सकते हो,
अगर तुम ठान लो तो रूख हवा का मोड़ सकते हो ।
सेवा ही ईश्वर- भक्ति ,सेवा में ही वह अपार शक्ति है ,
अर्पण करें, तो मीरा -भायंदर की काया बदल सकती है।
इतिहास साक्षी है कि केवल ताजमहल अमर नहीं है, वरन शाहजहाँ भी अमर है। वहीं जब कभी ताजमहल की तारीफ की जाती है, इसे बनानें वाले कारीगरों को भी हर दिल एक मौन श्रद्धांजली अवश्य अर्पित करता है।
न केवल नगरसेवकों वरन नगरवासियों को भी जागरूक होना होगा। अपने द्वारा चुकाए गए करों का लेखा-जोखा रखना होगा,उन्हें वह सब कुछ मिलना चाहिए, जो एक अच्छे करदाता व एक अच्छे नागरिक को मिलना चाहिए।
सबसे अधिक शिक्षा कर, मनोरंजन कर, वाहन कर,मिल्कत कर वसूल
करने वाली मीरा-भायंदर नगरपालिका अभी तक अपना एक चिकित्सालय (हॉस्पिटल, ),
उच्च स्तरीय इंग्लिश मीडियम स्कूल तथा एक नाट्यगृह (ऑडिटोरियम) जनता को
देने के नाम पर क्यों चुप्पी साधे बैठी है? छोटी-छोटी गुजराती ,मराठी ,हिंदी , उर्दू मीडियम शालाएँ इस विशाल नगरी के लिए सुन्दर कालीन पर टाट के पेबंद के समान है ।
आज मीरारोड की ज्वलंत समस्या व जरूरी आवश्यकता सर्व सुविधा युक्त हॉस्पिटल, नाट्यगृह एवं इंग्लिश मीडियम स्कूल एवम् नगरपालिका की सीटी बसें हैं ।
कब तक जनता को पानी व सड़क की समस्या में उलझाए रखेंगे? अन्य विकास कार्यों को गौण समझ, कब तक उसका फंड तिजोरी में सड़ता रहेगा । बड़े -बड़े नेतागण अपना-अपना स्कूल एवं हॉस्पिटल, खोले बैठे है । परन्तु यह विशाल नगरी निःशुल्क चिकित्सा, निःशुल्क शिक्षा, सस्ता एवम् सुलभ यातायात एवं मनोरंजन की अधिकारी है। आगामी पाँच वर्षों में मीरारोड को यह सब देना हर नागरिक एवं नगरसेवक का कर्त्तव्य होना चाहिए। "शिक्षादान महादान,रुग्ण सेवा महासेवा एवं नृत्य व नाट्यकला संस्कृति का प्रतिबिम्ब है।" यह नारा सार्थक कर मीरारोड के बच्चों को उज्जवल भविष्य प्रदान करें। नगरसेवक एवं नगरवासी मिलकर आगे आएं और इन जटिल प्रश्नों का समाधान करें । यही अपेक्षा ।
"करो कुछ नव-निर्माण कि
मीरा-भायंदर में नया सवेरा हो,
घृणा का पाप धोकर दिल से ,
स्नेह-धारा में नहाओ तुम ।
जागो फिर एक बार कि ,
मीरा-भायंदर को सजाओ तुम ।
नव युग में नव विचारों से,
नव सृजन कर जाओ तुम । "