Saturday, June 22, 2013

जयंतसेन सूरीश्वर न्यारे,विनती है चरण थारे।

सूरीश्वर न्यारे,विनती है चरण थारे।जत
*हर पल स्मरणीय गुरुदेव  के चरणों में अनगिनत वंदन के साथ सादर समर्पित*
चातक प्यासा वर्ष बिताता,
पुनः मिलन की आस में ,
मैं हर दिन गुरु स्मरण में बिताती ,
प्रत्यक्ष दर्शन की चाह में ।
विरह -व्यथा में व्याकुल नारी
कृष्ण दर्शन को आतुर गोपियाँ सारी
इस विध गुरु दर्शन की प्यासी अंखिया बेचारी,
हर पल सम्मुख रखे तोरी छवि मनोहारी।
तुम दर्शन की लगन लगी ऐसी भारी ,
अमन की अंखिया पल -पल दर्शन कर बलिहारी ,
शिष्या अर्ज करे विनती स्वीकारो गुरु म्हारी ,
मन-मंदिर से ओझल न कीजो सूरत थारी ।
संबल हो आप हमारे,प्रेरणा -पुंज पर वारी - वारी,
चिंतन -मनन की शक्ति आपसे मिलती न्यारी न्यारी ,
मोरे गुरुवर मोरे रहियो ,
मन-मंदिर  है थारी  क्यारी।
मन मंदिर में आप बिराजो
इतनी सी है विनती म्हारी ।
इतनी सी है विनती म्हारी ।।
डॉ. संध्या 'राज' मेहता
मीरारोड

Sunday, March 31, 2013

बर्बाद ए गुलिस्तां करने को हर शाख पर उल्लू बैठा है।जागो नगरवासियों ,जागो नगरसेवकों।




डॉ संध्या 'राज' मेहता



बर्बाद ए गुलिस्तां करने को हर शाख पर उल्लू बैठा है।
           जागो नगरवासियों ,जागो नगरसेवकों।

जिस प्रकार प्राचीन समय में भारत सोने की चिड़िया कहा जाता था ,लेकिन मुगलों ,मंगोलों ,अंग्रेजों ,मोहम्मद गजनवी जैसे विदेशियों ने इसे लूट-लूट कर खोखला कर डाला। यही किस्सा  मीरा-भायंदर नगरपालिका का है , यह नगरपालिका आज पूरे मुंबई या यों कहिए कि महाराष्ट्र की धनाड्य नगरपालिका  की श्रेणी  में आती है,ऐसी सोने की चिड़िया पर सबकी नजरें गड़ी हुई है । अतः नगरसेवकों से निवेदन है कि अपनी सेवा नगर को अर्पित करने का पाँच वर्ष का जो स्वर्णिम समय उन्हें मिला है ,वे उसका सदुपयोग करें । आपसी वैमनस्य व एक दूसरे की टाँग खींचने में अपना कीमती समय नष्ट न करें।   केवल वाह-वाही लूटने व दिखावे के लिए पोस्टर लगवाने में जनता की अमूल्य संपत्ति नष्ट न करेँ । सभी नगरसेवक यदि ठान लें तो वे इस विशाल सुनियोजित नगर को सुन्दर ,वैभवी  व शालीन नगरी की संज्ञा  दिलवा सकते हैं।
अगर तुम ठान लो तो तारे गगन के तोड़ सकते हो,
अगर तुम ठान लो तो रूख हवा का मोड़ सकते हो । 
सेवा ही ईश्वर- भक्ति ,सेवा में ही वह अपार शक्ति है ,
अर्पण करें, तो मीरा -भायंदर की काया बदल सकती है। 

इतिहास साक्षी है कि केवल ताजमहल अमर नहीं है, वरन शाहजहाँ भी अमर है। वहीं  जब कभी ताजमहल  की तारीफ की जाती है, इसे बनानें वाले कारीगरों को भी हर दिल एक मौन श्रद्धांजली अवश्य अर्पित करता है।
न केवल नगरसेवकों वरन नगरवासियों को भी जागरूक होना होगा। अपने  द्वारा चुकाए गए करों का लेखा-जोखा रखना होगा,उन्हें वह सब कुछ मिलना चाहिए, जो एक अच्छे करदाता  व  एक अच्छे नागरिक को मिलना चाहिए।
             सबसे अधिक शिक्षा कर, मनोरंजन कर, वाहन कर,मिल्कत कर वसूल करने वाली मीरा-भायंदर नगरपालिका अभी तक अपना एक चिकित्सालय (हॉस्पिटल, ), उच्च स्तरीय इंग्लिश मीडियम स्कूल तथा एक नाट्यगृह (ऑडिटोरियम) जनता को देने के नाम पर क्यों चुप्पी साधे बैठी है? छोटी-छोटी  गुजराती  ,मराठी ,हिंदी , उर्दू मीडियम  शालाएँ इस विशाल नगरी के लिए सुन्दर कालीन पर टाट के पेबंद के समान है ।
आज मीरारोड की ज्वलंत समस्या व जरूरी आवश्यकता सर्व सुविधा युक्त हॉस्पिटल, नाट्यगृह एवं इंग्लिश मीडियम स्कूल एवम् नगरपालिका की सीटी बसें हैं ।
कब तक जनता को पानी व सड़क की समस्या में उलझाए रखेंगे? अन्य विकास कार्यों को गौण समझ, कब तक उसका फंड तिजोरी में सड़ता रहेगा । बड़े -बड़े नेतागण अपना-अपना स्कूल एवं हॉस्पिटल, खोले बैठे है । परन्तु यह विशाल नगरी  निःशुल्क चिकित्सा, निःशुल्क शिक्षा, सस्ता एवम् सुलभ यातायात एवं मनोरंजन  की अधिकारी है। आगामी पाँच वर्षों में मीरारोड  को यह सब देना हर नागरिक एवं नगरसेवक का कर्त्तव्य होना चाहिए। "शिक्षादान महादान,रुग्ण सेवा महासेवा एवं नृत्य व नाट्यकला संस्कृति का प्रतिबिम्ब है।" यह नारा सार्थक कर मीरारोड के बच्चों को उज्जवल भविष्य प्रदान करें। नगरसेवक एवं नगरवासी मिलकर आगे आएं और इन जटिल प्रश्नों का समाधान करें । यही अपेक्षा ।
"करो कुछ नव-निर्माण कि 
मीरा-भायंदर में नया सवेरा हो,
घृणा का पाप धोकर दिल से ,
स्नेह-धारा में नहाओ तुम । 
जागो फिर एक बार  कि , 
मीरा-भायंदर को सजाओ तुम ।
 नव युग में नव विचारों से, 
नव सृजन कर जाओ तुम । "




     

Thursday, March 7, 2013

निबंध -खेलों की महत्ता

निबंध
खेलों की महत्ता बताते हुए किन्हीं  दो खेलों का वर्णन कीजिए ।

भूमिका खेलों के बारे में-एक पेज  
खेलों की महत्ता - 3  पेज 
प्रथम  खेल का वर्णन- 3 पेज 
द्वितीय खेल का वर्णन -3 पेज
 उपसंहार -एक पेज 
शेर- शायरियाँ प्रत्येक पेज पर एक या दो। 

भूमिका -


"खेलों से जीवन में आता है ,नित नवीन उत्साह, उल्लास व उमंग ,
खेल जीवन में लाता है,स्फूर्ति, चेतना व शारीरिक-सौष्ठव की तरंग ।"
जिस प्रकार दीपक से रोशनी पाने के लिए  तेल की आवश्यकता होती है, उसी तरह शरीर रूपी मशीन को ठीक से चलाने के लिए खेल की आवश्यकता होती है।कहा जाता है-
"तंदरुस्ती लाख नियामत के समान है।" एक स्वस्थ आदमी ही संसार की नियामतों का मजा लूट सकता है। शरीर को स्वस्थ और सुडौल बनाने के लिए व्यायाम की आवश्यकता होती है। खेलों से मनोरंजन के साथ-साथ व्यायाम भी मिलता है।
अतः खेल सुखी जीवन जीने का एक अमोघ अस्त्र है।

 आधुनिक वैज्ञानिक युग में भी मनुष्य कई तरह के खेल खेलकर तन एवं 
मन की सुन्दरता बनाने में कामयाब हो सका है।खेलों के वर्गीकरण के दो
 आधार  हैं,एक- देशी व विदेशी खेल एवं दूसरा-घरेलू व् बाह्य खेल। ।कबड्डी , खो -खो, गुल्ली -डंडा ,हॉकी इत्यादि देशी खेल हैं तथा फ़ुटबाल ,क्रिकेट,वालीवाल ,टेबल- टेनिस, लान-टेनिस, बास्केट बाल आदि विदेशी खेल की श्रेणी में आते हैं।इसी तरह शतरंज , केरम , चौपड़, ताश इत्यादि घरेलु खेल हैं,जिन्हें घर में खेला जा सकता है।क्रिकेट ,कबड्डी, खो-खो ,हॉकी ,टेनिस आदि खेलों के लिए मैदान की आवश्यकता होने से इन्हें बाह्य खेलों 
की संज्ञा दी गई है ।
खेल चाहे कोई भी हो खिलाड़ी को अपनी
सम्पूर्ण शक्ति व ध्यान के साथ खेलना पड़ता है ,तभी वह सच्चे खिलाड़ी के रूप में उभरकर सामने आता है।
 लगन, जोश व् खेल-भावना से खेलना ही ,खेल का सच्चा मर्म है,
क्या जीत में, क्या हार में,मुस्कुराना ही खिलाड़ी का धर्म है ।
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शालेय स्तर से  अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक खेलों का महत्त्व अपार है,
आज  तो खेल शारीरिक, मानसिक,आर्थिक उत्थान का भण्डार है। 

 Upsanvhaar

संसार चाहे कितनी भी वैज्ञानिक प्रगति कर ले, कितने ही कम्प्युराइज्ड खेलों का आविष्कार कर ले , लेकिन शारीरिक खेलों का अपना एक अनूठा सौंदर्य  व महत्त्व हर युग में बना रहेगा ,इसे कोई नहीं नकार सकता।
एशियाड, ओलंपिक खेलों के समय लगता जैसे आया है कोई त्यौहार ।
आज खेलों की छवि बिगाड़ ,जुगारियों ने बना दिया  है इसे व्यापार । 

संध्या राज मेहता - मीरा रोड