निबंध
खेलों की महत्ता बताते हुए किन्हीं दो खेलों का वर्णन कीजिए ।
खेलों की महत्ता बताते हुए किन्हीं दो खेलों का वर्णन कीजिए ।
भूमिका खेलों के बारे में-एक पेज
खेलों की महत्ता - 3 पेज
प्रथम खेल का वर्णन- 3 पेज
द्वितीय खेल का वर्णन -3 पेज
उपसंहार -एक पेज
शेर- शायरियाँ प्रत्येक पेज पर एक या दो।
भूमिका -
"खेलों से जीवन में आता है ,नित नवीन उत्साह, उल्लास व उमंग ,
खेल जीवन में लाता है,स्फूर्ति, चेतना व शारीरिक-सौष्ठव की तरंग ।"
जिस प्रकार दीपक से रोशनी पाने के लिए तेल की आवश्यकता होती है, उसी तरह शरीर रूपी मशीन को ठीक से चलाने के लिए खेल की आवश्यकता होती है।कहा जाता है-
"तंदरुस्ती लाख नियामत के समान है।" एक स्वस्थ आदमी ही संसार की नियामतों का मजा लूट सकता है। शरीर को स्वस्थ और सुडौल बनाने के लिए व्यायाम की आवश्यकता होती है। खेलों से मनोरंजन के साथ-साथ व्यायाम भी मिलता है।
"तंदरुस्ती लाख नियामत के समान है।" एक स्वस्थ आदमी ही संसार की नियामतों का मजा लूट सकता है। शरीर को स्वस्थ और सुडौल बनाने के लिए व्यायाम की आवश्यकता होती है। खेलों से मनोरंजन के साथ-साथ व्यायाम भी मिलता है।
अतः खेल सुखी जीवन जीने का एक अमोघ अस्त्र है।
मन की सुन्दरता बनाने में कामयाब हो सका है।खेलों के वर्गीकरण के दो
आधार हैं,एक- देशी व विदेशी खेल एवं दूसरा-घरेलू व् बाह्य खेल। ।कबड्डी , खो -खो, गुल्ली -डंडा ,हॉकी इत्यादि देशी खेल हैं तथा फ़ुटबाल ,क्रिकेट,वालीवाल ,टेबल- टेनिस, लान-टेनिस, बास्केट बाल आदि विदेशी खेल की श्रेणी में आते हैं।इसी तरह शतरंज , केरम , चौपड़, ताश इत्यादि घरेलु खेल हैं,जिन्हें घर में खेला जा सकता है।क्रिकेट ,कबड्डी, खो-खो ,हॉकी ,टेनिस आदि खेलों के लिए मैदान की आवश्यकता होने से इन्हें बाह्य खेलों
की संज्ञा दी गई है ।
खेल चाहे कोई भी हो खिलाड़ी को अपनी
सम्पूर्ण शक्ति व ध्यान के साथ खेलना पड़ता है ,तभी वह सच्चे खिलाड़ी के रूप में उभरकर सामने आता है।
लगन, जोश व् खेल-भावना से खेलना ही ,खेल का सच्चा मर्म है,
क्या जीत में, क्या हार में,मुस्कुराना ही खिलाड़ी का धर्म है ।
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शालेय स्तर से अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक खेलों का महत्त्व अपार है,
आज तो खेल शारीरिक, मानसिक,आर्थिक उत्थान का भण्डार है।
Upsanvhaar
Upsanvhaar
संसार चाहे कितनी भी वैज्ञानिक प्रगति कर ले, कितने ही कम्प्युराइज्ड खेलों का आविष्कार कर ले , लेकिन शारीरिक खेलों का अपना एक अनूठा सौंदर्य व महत्त्व हर युग में बना रहेगा ,इसे कोई नहीं नकार सकता।
एशियाड, ओलंपिक खेलों के समय लगता जैसे आया है कोई त्यौहार ।
आज खेलों की छवि बिगाड़ ,जुगारियों ने बना दिया है इसे व्यापार ।
संध्या राज मेहता - मीरा रोड
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