जयंत जन्म जयंति
जय गुरुदेव
मुख जिनका कमल है
दृष्टि जिनकी निर्मल है
पैर जिनके पावन हैं
मूरत जिनकी मनभावन है।
ऐसे गुरुराज को शत शत वन्दन है।
जन्मदिन सब मनाएंगे
गुरुगुण दिल से अपनाएंगे।
जैनम जयति शासनम्
ऐसे गुरु मिले जनम जनम
जन्म दिन है साता में रहियो
संघ चिंता धीमे धीमें तजियो।
मन मंदिर में सबके बसियो
अरज भरी विनती सुनियो।
मोरे गुरुवर मोरे रहियो।
डॉ. संध्या 'राज' मेहता
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