"खुद के लिए जिए ,खुद के लिए मरे|
जिए तो क्या जिए ,मरे तो क्या मरे|"
उपरोक्त उक्ति चरितार्थ करने में सदा लगी,
सोच विचार का दायरा सदा बढाने में लगी|
अपनों के लिए कार्य करो, अपनों को मदद करो,
अपनों के लिए जियो अपनों के लिए मरो|
अपनापन का भाव लेकर जीवन में आगे बढ़ी ,चल पड़ी,
वर्षों बीत गए अपनों पर मरी ,अपनों के लिए लड़ी|
जब अपनों की ठोकर लगी ,सपनों की नींद जगी|
तब कई और नई कहावत दिल में घर करने लगी|
"न खुद के लिए जियो ,न केवल अपनों के लिए जियो,
न अपनापन की चाह में जियो ,न मर मर के जियो|"
"जियो तो सिर्फ अपने सपनों के लिए जियो,
मरो तो अपने सपने साकार करने के लिए मरो"
अपने सपने साकार करने में लहू की हर एक बूँद लगा दे,
अपनों से मत अपेक्षा रख बन्दे, अपने न जाने कब दगा दे|
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