Sunday, July 17, 2011

हिंदी निबंध हेतु काव्य-पंक्तियाँ

हिंदी निबंध हेतु काव्य-पंक्तियाँ 

देशभक्ति ,राष्ट्रभाषा ,संस्कृति ,परिवार,वृक्ष ,प्रकृति इत्यादि -:
"जो भरा नहीं भावों से,
 बहती जिसमें रसधार नहीं,
वह ह्रदय नहीं पत्थर है,
जिसे स्वदेश से प्यार नहीं|"

आत्मकथा 
"जिन्दगी ऐसी बना,ज़िंदा रहे दिलसाज़ तू,
जब तू न रहे दुनिया में,दुनिया को याद आए तू|" 
जीवन में संतोष-
"हर कोई स्नेह की क़द्र करता नहीं,
हर एक फूल मंदिर पर चढ़ता नहीं|
हजारों राहगीर राह से गुजर जाते हैं मगर ,
 हर कोई सफलता की मंजिल तक पहुंचता नहीं|"
 वृक्ष -
"मुस्कराहट इन्हीं से मिलती है ,
एक राहत इन्हीं से मिलती है|
रूठना मत कभी इन वृक्षों से,(किताबों से)
गुनगुनाहट इन्हीं से मिलती है|"
"भूगोल बने इतिहास जगे,
 ऐसा कुछ परिवर्तन कर दो|
ओ तरूण देश के यों महको,   
घर आँगन को चन्दन कर दो|"

नदी किनारे-
"मंद पवन के झोंके,
शांत लहरों का प्रवाह,
खग समूह का उन्मुक्त विचरण,
यही है नदी-किनारे का स्मरण|"
संगणक-
दुनिया हो चाहे जेब में,
मानव स्वयं कमरे की कैद में|
लाखों रिश्ते जोड़ के,
अपनों से नाते तोड़ ले|

विज्ञान -
विशेष ज्ञान ही नहीं ,विनाशकारी ज्ञान भी है यह,
मानव ही नहीं दानव के लिए भी वरदान है यह|

 केवल हंगामा खडा करना मेरा मकसद नहीं,
मै तो विज्ञान की सही तस्वीर दिखाना चाहता हूँ|

उठे समाज तेरे कंधे पर,
 बढे प्रगति के प्रांगन में,
भूतल को रख दिया उठाकर ,
तूने नभ के आँगन में| 
परीक्षा\शिक्षक /hindihindi
बिखरो तुम नई मुस्कान ,
फिर जग में नया सवेरा हो|
घृणा का पाप धोकर,
स्नेह धारा में नहाओ तुम ,
नए युग में विचारों की
नई गंगा बहाओ तुम|
भारतीय किसान
ऋण में जन्मा,ऋण में पला, ऋण में जिया-मरा|
श्रम के इस सिपाही पर भी एक नजर डालें ज़रा|
मेरे देश की धरती, सोना उगले, उगले हीरे मोती|
 किसानों ने की हरित क्रान्ति, वरना एसिड की वर्षा होती|
कठोर परिश्रम और लगन से ,

खेतों को उसने है तराशा| 

सबको मिले अन्न,हर मन प्रसन्न,
यही है किसानों की अभिलाषा|
तुम सागर मंथन कर सकते हो,
तुम पर्वत से टकरा सकते हो,
तुम जीवन संगीन मौत के
घर में घुसकर गा सकते हो|
जल ही जीवन
पाँच तत्वों से बना शरीर ,
 जल उनमें से है एक,
जल से ही जीवन है ,
जल के हैं गुण अनेक|
रहिमन पानी राखिए,बिन पानी सब सून|
पानी गए न ऊबरे ,मोती,मानूष ,चून|                         a
सैनिक -
हम भारत के भावी सैनिक,
शांति हमारा नारा है|
अगर कोई हमसे लड़ना चाहे,
सम्मान हमें भी प्यारा है|
चातक प्यासा वर्ष बिताता ,
स्वाती बूँद की चाह में,
में विरह के क्षण बिताती ,
पुनः मिलन की आस में|-सैनिक की पत्नी
तन है घायल,मन है भीना ,
फिर भी कितना जोश है| 
भारत माँ के लिए जीना- मरना,
केवल यही एक होंश है|
परीक्षा
कई निडर ,कई दीवाने बने फिरते हैं|
परीक्षा के मौसम में सबके दिल धड़कते हैं|
दिन- दूनी, रात- चौगुनी, मेहनत की तमाम है,
नींद गई, चैन गया,खाना पीना हराम है|
क्या बताएं यारों कितने हम परेशान हैं,
देखकर हमारी हालत ,शिक्षक भी हैरान है|
अभिशाप-
जागो फिर एक बार ,
सिंहों की माँदों में ,
आया है एक स्यार ,
जागो फिर एक बार|- भ्रष्टाचार रूपी स्यार ,महंगाई रूपी स्यार ,आतंकवाद, 
विज्ञान  ,अशिक्षा ,प्रदूषण 
दीपावली-
जगमग जलते दीप अन्धकार हरते हैं|
अमावस की रात में तारों से चमकते हैं|
जलकर दीप जग में प्रकाश ही नहीं करते हैं ,
जन- जन के मन में उत्साह-उमंग भी  भरते  हैं|  
पर्यावरण -

 गाँव-गाँव और शहर-शहर में ,
फैलानी होगी क्रांति |
प्रदुषण हटाओ पर्यावरण बचाओ ,
तभी मिलेगी सुख-शान्ति|

***
अगर तुम ठान लो तो तारे गगन के तोड़ सकते हो,
अगर तुम ठान लो तो रुख हवा का मोड़ सकते हो|
***
कवि की कलम में जो ताकत होती है,
वह बन्दूक और तलवार में नहीं होती...
कवि के विचारों में जो क्रांति होती है,
वह किसी अख़बार में नहीं होती...



कवि एक साधक है,
कविता उसकी साधना...
कवि ईश्वर का अवतार है,
कविता उसकी रचना...”








 

11 comments:

  1. अशोक कुमार वर्माJune 18, 2012 at 11:09 AM

    बहुत ही अच्‍छा संकलन है। उपलब्‍ध कराने के लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद।।

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  2. अति सुन्दर कविता लिखी है आपने।
    धन्यवाद दीदीजी।
    जय श्री राम

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  3. Very interesting and beautiful

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  4. Kai aap ek universal poem bana sakte hai jo sabhi atmakathanatmak nibandha ko chale

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  5. Can you post quotes which can be involved in std 9 ICSE Hindi essays writings

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  6. Very nice, upload more

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  7. बहुत ही सुन्दर और उपयोगी संकलन

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