Sunday, November 27, 2016

जयंत जयंती जयनाद

        जयंत जयंति जयनाद
तर्ज-म्हारी झूमर है नखराली......

म्हें तो जन्मदिवस मनावां गुरुराज
थांका गुण अनोखा गावां सूरिराज
अवसर आयो आज म्हारे द्वार
सूरज उग्यो आज तारणहार
जैन संघ ए पायो आज रक्षणहार।।

मगसर वद तेरस रे दिन ,जनम्या पूनमचन्द,
धन्य धन्य पेपराल गाँव सूरिराज।।सूरज उग्यो आज.....
तात स्वरूपचंद हर्षाए ,माँ पार्वती करे दुलार,
इतो बालपणे संयम धारयो सूरिराज।।सूरज...
मात-तात सब छोड़िया, कियो गुरु रो संग,
ई तो पञ्च महाव्रत पालक सूरिराज।सूरज...
उग्र विहारी ,पर उपकारी थें, सब जन करे जय जयकार ,
ई तो सूरि राजेन्द्र गच्छ ना शिरोमणि गुरुराज।।सूरज...
हिंदी ,संस्कृत ,प्राकृत,इंग्लिश, कन्नड़ तेलगु तमिल,
ई तो गुजराती , मराठी भाषा ज्ञाता सूरिराज।।सूरज.....
जयंत ज्योति जगमग चमके ,अखंड रहे जीवन ज्योत,
वंदन कर शुभ-भावना भायें सूरिराज।।सूरज...
म्हें तो जन्मदिवस मनावां सूरिराज
थांका गन अनोखा गावां सूरिराज।
अवसर आयो आज म्हारे द्वार
सूरज उग्यो आज तारणहार
जैन संघ ए पायो आज रक्षणहार।।

संध्या 'राज' मेहता ,मीरा रोड

Saturday, November 12, 2016

बेबस जिंदगी

बेबस जिंदगी
एक अल्हड जिंदगी को मौत से रूबरू होते देखा।
ख्वाहिशों को सिरहाने रख जीते जी मरते देखा।
हर पल मुस्काती जिंदगी को दर्द से कराहते देखा।
जी भर प्यार लुटाने वाली को प्यार के लिए तरसते देखा।
ईश्वर तेरी कृपा उस में देखी तेरा रूठना भी उसी में देखा।
जल बिन मछली का तड़पना आज उस इस तड़पन में देखा।
बस भी कर अब लीला तेरी तूने जो चाहा सबकुछ देखा।
डॉ संध्या 'राज' मेहता

परीक्षा और विद्यार्थी

सहमे-सहमे , डरे-डरे से कई चेहरे हैं ,
पुस्तकों के हाथों देखो बने मोहरे हैं।

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कई निडर ,कई निर्दोष बने फिरते हैं ,
परीक्षा के मौसम में सबके दिल धड़कते हैं।

दिन-दूनी , रात-चौगुनी  मेहनत की तमाम है ,
नींद गई, चैन गया, खाना पीना हराम है।

क्या बताएँ यारों , कितने हम परेशान है?
देखकर हमारी हालत शिक्षक भी हैरान हैं।

"शिक्षण ही जीवन की कुंजी " नारा यह महान है,
पर उच्च शिक्षण भी कहाँ इतना आसान है।

उच्च शिक्षा की दौड़ में, दौड़ रहेहैं  हम सब ,
जारी रहेगी दौड़,अव्वल न आए तब तक।

बो दिए हैं बीज ,ज्ञान, ध्यान, परिश्रम डाला है ,
चिंता रहेगी सदा ,फल कब आने वाला है।

- डॉ. संध्या 'राज' मेहता
संशोधन - 22 एप्रिल 2020