Saturday, November 12, 2016

परीक्षा और विद्यार्थी

सहमे-सहमे , डरे-डरे से कई चेहरे हैं ,
पुस्तकों के हाथों देखो बने मोहरे हैं।

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कई निडर ,कई निर्दोष बने फिरते हैं ,
परीक्षा के मौसम में सबके दिल धड़कते हैं।

दिन-दूनी , रात-चौगुनी  मेहनत की तमाम है ,
नींद गई, चैन गया, खाना पीना हराम है।

क्या बताएँ यारों , कितने हम परेशान है?
देखकर हमारी हालत शिक्षक भी हैरान हैं।

"शिक्षण ही जीवन की कुंजी " नारा यह महान है,
पर उच्च शिक्षण भी कहाँ इतना आसान है।

उच्च शिक्षा की दौड़ में, दौड़ रहेहैं  हम सब ,
जारी रहेगी दौड़,अव्वल न आए तब तक।

बो दिए हैं बीज ,ज्ञान, ध्यान, परिश्रम डाला है ,
चिंता रहेगी सदा ,फल कब आने वाला है।

- डॉ. संध्या 'राज' मेहता
संशोधन - 22 एप्रिल 2020

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