बेबस जिंदगी
एक अल्हड जिंदगी को मौत से रूबरू होते देखा।
ख्वाहिशों को सिरहाने रख जीते जी मरते देखा।
हर पल मुस्काती जिंदगी को दर्द से कराहते देखा।
जी भर प्यार लुटाने वाली को प्यार के लिए तरसते देखा।
ईश्वर तेरी कृपा उस में देखी तेरा रूठना भी उसी में देखा।
जल बिन मछली का तड़पना आज उस इस तड़पन में देखा।
बस भी कर अब लीला तेरी तूने जो चाहा सबकुछ देखा।
डॉ संध्या 'राज' मेहता
एक अल्हड जिंदगी को मौत से रूबरू होते देखा।
ख्वाहिशों को सिरहाने रख जीते जी मरते देखा।
हर पल मुस्काती जिंदगी को दर्द से कराहते देखा।
जी भर प्यार लुटाने वाली को प्यार के लिए तरसते देखा।
ईश्वर तेरी कृपा उस में देखी तेरा रूठना भी उसी में देखा।
जल बिन मछली का तड़पना आज उस इस तड़पन में देखा।
बस भी कर अब लीला तेरी तूने जो चाहा सबकुछ देखा।
डॉ संध्या 'राज' मेहता
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