1.शेयर के सोदे के पूर्व की सावधानियाँ
शेयर खरीदने - बेचने से पूर्व बहुत सी जानकारी होना जरूरी है| सम्पूर्ण जानकारी के बिना शेयर बाजार में निवेश करने से नुकसान होने की संभावना रहती है| इसलिए प्रत्येक निवेशक को सम्पूर्ण जानकारी ले लेनी चाहिए|
मुख्यतः भारत में एन.एस.इ. और बी. एस इ. स्टॉक एक्सचेंज पर शेयर के सोदे होते हैं| आजकल दोनों स्टॉक एक्सचेंज सुबह ९ बजे खुल जातें है और दोपहर ३:३० बजे तक शेयर के सोदे होते हैं| सोदा करने के लिए क्लायंट कोड देना होता है, जिसमें सोदा करना है| गलत कोड में सोदा होने पर नुकसान निवेशक को होता है| यदि डे ट्रेडिंग में सोदा करना है तो सुबह जिस एक्सचेंज में खरीदने का सोदा किया हो, उसी में बेचने का सोदा भी करना चाहिए ,नहीं तो शेयर की नीलामी एक एक्सचेंज में होगी और डिलीवरी के पैसे दूसरे एक्सचेंज में देने पड़ेंगे|
यदि बेचने का सोदा किया हो तो निवेशक को शेयर की डिलीवरी स्वयं के खाते में से शेयर दलाल को देना जरूरी है,नहीं तो शेयर की नीलामी हो जाती है|
ऐसा नुकसान न हो, इसलिए शेयर दलाल के पास ही निवेशक को अपना डीमेट खाता खुलवाना चाहिए|
ऐसा नुकसान न हो, इसलिए शेयर दलाल के पास ही निवेशक को अपना डीमेट खाता खुलवाना चाहिए|
ऐसा करने से निवेशक अपने समय, शक्ति और नुकसान को बचा सकता है| शेयर खरीदने के पश्चात शेयर की डिलीवरी स्वयं के डीमेट खाते में आ गई हो तो ही बेचने के सोदे देना चाहिए, अन्यथा शेयर की नीलामी हो सकती है और नुकसान निवेशक को ही भुगतना पड़ता है|
शेयर में राइट्स,बोनस या डिविडेंड घोषित हो तो उसका रिकार्ड तारीख और बुक बंद होने की तारीख जानने के पश्चात ही निवेशक को शेयर खरीदने या बेचने का निर्णय लेना चाहिए| यदि निवेशक ने कम-बोनस, कम-राइट्स या कम-डिविडेंड में शेयर खरीदें हों तो ही वह बोनस ,राइट्स या डिविडेंड का हकदार है| एक्स बोनस , एक्स राइट्स या एक्स डिविडेंड शेयर खरीदने वाले को बोनस ,राइट्स या डिविडेंड नहीं मिलता है| उसको इसके लिए कीमत भी कम देनी पड़ती है| बहुत बार शेयर स्प्लिट होते हैं| उदाहरण के तौर पर सौ रूपए का एक शेयर दस -दस रूपए के दस शेयर में बदल जाते हैं| आपके डीमेट खाते में अपनेआप एक शेयर के बदले दस शेयर आ जाते हैं|
शेयर का भाव भी दसवें भाग का हो जाता है| बोनस या डिविडेंड भी अपनेआप आपके डीमेट खाते में या बेंक खाते में आ जाता है|
शेयर की कंपनी बोनस या डिविडेंड के लिए आवश्यक जानकारी आपके डीमेट खाते में से लेती है| अतः आपके डीमेट खाते का पता और बैंक खाता जरूरत पड़ने पर बदलते रहना चाहिए|
यदि निवेशक के पास फिज़िकल शेयर हों तो वे स्वयं के नाम पर है कि नहीं उसका ध्यान रखना चाहिए| पता विशेष रूप से देख लेना चाहिए अन्यथा राइट्स, बोनस या डिविडेंड शेयर पुराने पते पर कंपनी भेजेगी और आपको वे मिलेंगे नहीं| ऐसे नुकसान से बचने के लिए निवेशक को सारे फिज़िकल शेयर डीमेट करवा लेना चाहिए| ऍसा करने से बोनस या डिविडेंड अपने आप आपके डीमेट खाते या बेंक खाते में आ जायेंगे| निवेशक को डिविडेंड स्वयं के खाते में अपनेआप लेने के लिए (ECS) इलेक्ट्रानिक क्लियरिंग सिस्टम की सुविधा लेनी चाहिए| शेयर में जब राइट्स मिलता है तब वह लेने के लिए निवेशक को निवेदन करना पड़ता है| आपको मिले हुए राइट्स के अलावा ज्यादा शेयर हेतु भी आप निवेदन कर सकते हैं |यदि निवेशक को राइट्स के लिए निवेदन करके शेयर में निवेश करने की इच्छा न हो तो राइट्स शेयर निवेदन करने के पहले ही बेच सकता है| सामान्यतः राइट्स के सोदे स्टॉक एक्सचेंज पर नहीं होते हैं| निवेशक को स्वयं या स्वयं के दलाल के द्वारा राइट्स बेचने पड़ते है| इसके लिए निवेशक को राइट्स के निवेदन पर हस्ताक्षर करके खरीददार को देना पड़ता है|
शेयर पूर्णतः चूकता या अंशतः चूकता हो सकते हैं| दोनों प्रकार के शेयर शेयर बाजार में सूचीबद्ध हो सकते हैं| शेयर बेचते समय निवेशक को स्वयं के शेयर पूर्णतः चूकता या अंशतः चूकता हैं,यह जान लेना चाहिए| इसके बाद ही बेचने का सोदा शेयर दलाल को देना चाहिए| बहुतसे शेयर के नाम एक -दूसरे से मिलते - जुलते होते हैं| अतः उनके नाम में किसी भी प्रकार का संशय हो तो सोदे के पहले ही उसकी निश्चिंतता कर लेनी चाहिए| शेयर का ISIN नंबर और उसका कोड नंबर जानकर यह संशय दूर कर सकते हैं|
डीमेट खाते में शेयर के नाम के साथ ISIN नंबर मिलता है|
निवेशक यदि इन सब प्रकार की जानकारी लेने के पश्चात सोदा शेयर दलाल को देता है ,तो उसे व्यर्थ परेशान नहीं होना पड़ता| निवेशक स्वयं को फालतू नुकसान से भी बचा सकता है| शेयर दलाल के साथ भी किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न नहीं होगी| शेयर दलाल के साथ उसके मधुर सम्बन्ध बने रहेंगे| उसके निवेश पर पूरा-पूरा लाभ मिलेगा| स्वयं के निवेश के बारे में वह निश्चिन्त होकर अपना कीमती समय दूसरी जगह दे सकता है| बाद में उसे पछताना नहीं पड़ता है| स्वयं के निवेश के बारे में स्वयं को जानकारी है इसका संतोष मिलता है| निवेशक की गैरहाजिरी में उसके परिवार के लोगों को तकलीफ नहीं होती है और उन्हें सच्चे अर्थ में निवेश उपयोगी सिद्ध होगा|
No comments:
Post a Comment