आईपीओ में निवेश और जरूरी सावधानियाँ
शेयर में निवेश करने का एक तरीका आईपीओ (इनिशिअल पब्लिक ऑफरिंग) में अर्जी करना भी है| शेयर के नए ऑफर में छूटक निवेशक एक लाख या उससे कम रकम निवेश कर सकता है| अर्जी देने के पंद्रह दिन में जितने शेयर आपको उपलब्ध हुए होंगे वे आपके डीमेट खाते में आ जाते हैं और बाकि रूपए अपने आप निवेशक के खाते में जमा हो जाते हैं| तीन-चार दिनों में ही इस नए शेयर का लिस्टिंग होता है, तब निवेशक अपने लगे हुए शेयर बेच सकता है| सामान्यतः नए लगे हुए शेयर ऊँची कीमत में आए होने से लिस्टिंग के दिन ही अगर ज्यादा कीमत मिले तो उन्हें बेचकर नफ़ा कर लेना हितकर होता है|
नए शेयर जारी करते समय निवेशकों की अर्जियाँ कई बार जरूरत से कई गुना अधिक आ जाती हैं, छूटक निवेशक के लिए नए जारी किए गए शेयर का जितना भाग अलग से तय किया गया हो उससे भी अधिक शेयर की अर्जियाँ आने की स्थिति में छूटक निवेशकों को भागांश में शेयर दिए जाते हैं| उदाहरण के लिए - यदि एक लाख शेयर छूटक निवेशकों हेतु निश्चित किये गए हों,किन्तु पांच लाख शेयर की अर्जियां आ जाती हैं तो प्रत्येक निवेशक को पांच शेयर की अर्जी के सामने केवल एक ही शेयर मिलेगा|
सामान्यतः IPO में तीन बीडर होते हैं|(१) QIB (क्वालिफाइड इन्सटीट्युशनल बीडर) (2) NIB (नोन-इन्सटीट्युशनल बीडर) और (3) RIB (रिटेल इनडीवीडयुल बीडर)| इन तीनो वर्गों के लिए नए जारी किए गए शेयर के अलग -अलग भाग रखे जाते हैं | तीनो वर्गों से अर्जियाँ कितनी बार भरी गई हैं, ये अलग से जाना जाता है| तीनो वर्गों की अर्जियाँ मिलकर कुल कितनी बार IPO भरा गया है,यह जानकारी भी मिलती है|तीनों वर्गों को कितने शेयर मिलेंगे, यह प्रत्येक वर्ग से कितनी बार अर्जियां भरी गयी हैं, उस पर आधारित है| इन तीनों वर्गों में से यदि किसी एक भी वर्ग से अर्जियां पूर्णतः नहीं भरी जाती हैं,तब इस वर्ग के शेयर का भाग दूसरे वर्गों को दे दिया जाता है,जिनमें अर्जियां एक से ज्यादा बार भरी गई हों| QIB (क्वालिफाइड इन्सटीट्युशनल बीडर) वर्ग को अर्जी करते समय केवल १० % मार्जिन रकम ही भरनी पड़ती है| कोई कंपनी अर्जी भरते समय २५ % या उससे कम रकम भी मंगवाती है| बाकि रकम एलोटमेंट के समय रिफंड में से काट ली जाती है या थोड़ी बची हुई रकम भविष्य में कॉल के रूप में मँगवायी जाती है, इन्हीं शर्तों पर शेयर अलॉट किये जाते है| ऐसे समय में जारी किए गए शेयर पार्टली पेड (अंशतः चुकते) होते हैं| ऐसे शेयर भी शेयर बाजार में अंशतः चुकते (पार्टली पेड) के रूप में लिस्टेड होते हैं|
IPO दो प्रकार के होते हैं - १.बुक बिल्ड ऑफर्स २.फिक्स्ड प्राइज ऑफर्स
बुक बिल्ड ऑफर्स - इसमें दो कीमतें शेयर की अर्जी के लिए दी जाती है| - १.फ्लोर प्राइज (FLOOR PRICE) ~ यह शेयर की न्यूनतम कीमत होती है|
२.कट ऑफ़ प्राइज (CUT OFF PRICE) ~ यह शेयर की ज्यादा से ज्यादा कीमत होती है|
निवेशक फ्लोर प्राइज अथवा उससे ज्यादा कीमत देकर अर्जी कर सकता है| यदि निवेशक ज्यादा से ज्यादा जो कीमत होती है उसके लिए अर्जी करता है तबभी जिस कीमत से शेयर जारी किए गए हों, उसी कीमत से उसे शेयर मिलते हैं| इसके लिए अर्जी के फार्म में निवेशक को CUT OFF पर निशान करना चाहिए|
फिक्स्ड प्राइज़ ऑफर्स - इसमें जारी किए गए शेयर की एक ही
कीमत तय रहती है|
-शेयर की अर्जी HUF (हिन्दु अन डिवाइडैड फेमिली ) भी कर सकती है|
-HUF स्वयं कर्ता के रूप में भी अर्जी कर सकता है|
-शेयर की अर्जी पार्टनरशिप फर्म नहीं कर सकती है|
-शेयर की अर्जी के लिए बीड लाट दर्शाया जाता है| निवेशक को कम से कम एक लाट के लिए अर्जी करनी पड़ती है|ज्यादा से ज्यादा इतने लाट के लिए अर्जी करनी चाहिए,जिससे अर्जी की रकम 1,00,000 से ज्यादा न हो|अर्जी की रकम यदि १,००,००० से ज्यादा बढ़ जाती है तो उसे रिटेल(छूटक) निवेशक नहीं गिना जाता है|
शेयर के इश्यू (जारी किए शेयर ) में अर्जी करके शेयर प्राप्त करने के कितने ही फायदे हैं,जैसे कि-अर्जी करने के पश्चात पंद्रह दिन में ही आपका पैसा या शेयर आपके डीमेट खाते में या बैंक खाते में जमा हो जाते हैं|यदि कंपनी का शेयर इश्यू ज्यादा भर जाता है तो निवेशक को केवल थोड़ी ही रकम के शेयर प्राप्त होते हैं,बाकि की रकम पुनः मिल जाती है|इस स्थिति में निवेशक की जोखिम भी बहुत कम हो जाती है| उदाहरण के लिए मान लो कि रिटेल भाग दस बार भर जाता है तो निवेशक को १,००,००० रु. की अर्जी में से केवल दसवें भाग के यानि १०,000 रु. के शेयर ही मिलते हैं| बाकि के ९०,००० रु. का रिफंड उसके बैंक खाते में जमा हो जाता है|यदि बाशयेर बाजार अर्जी करने के पंद्रह दिनों में नीचे गिरता है तो भी निवेशक को १०,००० रु. के शेयर पर ही जोखिम उठानी पड़ेगी|यदि १,००,००० रु. शेयार बाजार में रोके होते तो जोखिम भी उतनी ही बढ़ जाती|
शेयर की अर्जी करने के पश्चात यदि तुरंत ही शेयर बाजार अत्यधिक गिर जाता है तो चेक पास होने के पहले ही निवेशक स्टॉप पेमेंट करवा सकते हैं| एसी अवस्था में निवेशक को शेयर नहीं दिये जाते हैं और पूरी रकम पुनः मिल जाती है|चेक पास होने के पश्चात और शेयर मिलने के पहले यदि शेयर मार्केट नीचे गिरता है और निवेशक यदि शेयर लेना नहीं चाहता है,तब एक पत्र लिखकर शेयर एलोट न करने हेतु वह आवेदन कर सकता है|इस आवेदन पत्र के मिलने के पश्चात निवेशक को शेयर एलाट नहीं किए जाते है और उसे पूरा रिफंड दिया जाता है|
इस प्रकार निवेशक IPO में स्वयं की जोखिम कम कर सकता है| कभी-कभी अंदाज से जितने श्येर एलाट होने की संभावना होती है,वे OFF MARKET (आफ मार्केट) में PRIMIUM (प्रीमियम) से बेचकर भी संभावित नुकसान (हानि ) से बचा जा सकता है इस प्रकार आईपीओ में अर्जी करके निवेशक कम से कम जोखिम उठाकर ज्यादा व अच्छा लाभ कमा सकता है|इसके अलावा निवेश केवल एक महीने से भी कम समय हेतु करने से पैसे की तरलता भी रहती है|
लेखक-राजेंद्र एच. मेहता (C.A.)
अनुवादक- डा. संध्या 'राज' मेहता
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