Wednesday, December 29, 2010

कंपनी की विगतवार जानकारी लेकर ही सही निष्कर्ष निकालें| अथवा 
  कंपनी की विगतवार जानकारी एवं उसके शब्दों का सही अर्थ समझकर ही निष्कर्ष निकालें|

शेयर बाजार में निवेशक जिस कंपनी के शेयर में निवेश कर रहा है,उसकी सम्पूर्ण जानकारी अवश्य ले लेनी चाहिए| इस जानकारी हेतु उसे संशोधन अहेवाल(जानकारी) पढ़कर समझना जरूरी है| इस प्रकार का अहेवाल जाने-माने शेयर दलाल और इकोनोमिक टाइम्स जैसे समाचार पत्र प्रकट करते रहते हैं| वे कंपनी के प्लोट का दौरा कर मुलाक़ात करते हैं| कंपनी के कर्मचारियों के पास से जरूरी जानकारी प्राप्त करते हैं और कंपनी की 
बेलेंसशीट वगैरह जांच-परख कर स्वयं की राय (अहेवाल) प्रकट करते हैं| इस प्रकार के अहेवाल समझना सरल होता है लेकिन फिर भी निवेशक को अहेवाल में उपयोग में आने वाले शब्दों का सही अर्थ समझना जरूरी है| पूरा अहेवाल पढ़कर निवेशक स्वयं सम्पूर्ण रूप से उसे समझे और उसका सही निष्कर्ष निकालकर खुद स्वतंत्र निर्णय ले,यह नितांत आवश्यक है|
अहेवाल में सामान्य रूप से प्रयोग होने वाले शब्द इस प्रकार हो सकते हैं- इक्विटी, प्रमोटर्स स्टेक, फेस वेल्यु(FV), बुक वेल्यु(BV), रिटर्न आन नेट वर्थ (RONW),एक्स बोनस (XB or Ex-Bonus),ऑपरेटिंग प्रोफिट मार्जिन(OPM),प्रोफिट आफ्टर टेक्स (PAT),प्रोफिट आफ्टर इंटरेस्ट
 डेप्रिसिएशन एंड टेक्स (PBIDT),अर्निंग पर शेयर,प्राइस अर्निंग रेशियो ,इंडस्ट्री पी. इ.,इंडस्ट्री मार्केट केपिलाइजेशन,ट्रेइलिंग ट्वेल्व मंथ्स,इयर एंड ,रिज़र्व कंसोलिडेटेड,स्टेंड एलोन, फाइनेन्सियल इयर एवं केलेंडर इयर आदि - इत्यादि | 
कंपनी अपनी  बेलेंस  शीट में जो सामान्य शेयर केपिटल दिखाती है उसे इक्विटी कहते हैं| जितने शेयर जारी किए जाते हैं उन्हें इस्युड केपिटल
कहा जाता है| शेयर धारक जितने शेयर में  पैसा रोकता है उसे सब्सक्राइब्ड
केपिटल  कहा जाता है| यह केपटल भी पूर्णतः या अंशतः पेड अप हो सकती है|इक्विटी केपिटल में प्रमोटर के जितने शेयर होते हैं उन्हें प्रमोटर्स स्टॉक कहा जाता है|सामान्यतः यह आँकड़ा प्रतिशत  में दर्शाया जाता है| कंपनी को जितनी रकम की केपिटल इश्यू करने की मंजूरी मिली  है उसे ओथोराइस्ड केपिटल कहा जाता है|ओथोराइस्ड केपिटल का आँकड़ा बेलेंस शीट के हिसाब में गिनने में नहीं आता है|
मान  लीजिए  कि एक कंपनी को दस रुपिया का एक ऐसे एक लाख शेयर जारी करने की अनुमति है ,इस कंपनी की ओथोराइस्ड शेयर केपिटल दस लाख गिनी जाती है|(१०*१,००,०००)| अब यदि कंपनी केवल पचास हजारशेयर इश्यु करती है तो इस्युड केपिटल पांच लाख गिनी जाती है (१०*५,००,००)| ये पचास हजार शेये कंपनी प्रति शेयर तीस रूपए में देती है तो कंपनी के शेयर की फेस वेल्यु (FV) दस रूपए और बुक वेल्यु (BV) तीस    रूपए  गिनी  जाती  है| यदि सभी शेयर का कोटा पूर्णतः भरा जाता है तो कंपनी को कुल पंद्रह लाख रूपए मिलेंगे (३०*५०,०००)| कंपनी स्वयं की बेलेंस शीट में इस्युड,सब्सक्राइब्ड और पेड अप केपटल के रूप में पांच लाख रूपए ही बताएगी|(१०*५०,०००)|और बाकि के दस लाख रूपए कंपनी शेयर प्रीमियम खाता में बताएगी (२०*५०,०००)|ये खाता कंपनी का रिज़र्व फंड गिना जाता है|
इस प्रकार कंपनी को मिले हुए पंद्रह लाख रूपए में से पांच लाख रूपए इस्युड, सब्सक्राइब्ड और पेड अप केपिटल गिनी जाती है और बाकि के दस लाख रूपए कंपनी का रिज़र्व फंड गिना जाता है| यदि कंपनी के प्रमोटर्स ने स्वयं साडे सात लाख रूपए सब्सक्राइब्ड किए हों तो कंपनी में प्रमोटर्स स्टॉक ५० % गिना जाता है|कंपनी इक्विटी शेयर केपिटल के अलावा प्रिफरेंस शेयर केपिटल भी जारी कर सकती है|ऐसे शेयर को डिविडेंड के लिए प्रथम पसंदगी दी जाती है| यदि कंपनी को प्रोफिट होता है और वह डिविडेंड देती है तो सबसे पहले प्रिफरेंस शेयर को डिविडेंड मिलता है,उसके बाद जो प्रोफिट बचे उसमें से सामान्य शेयर (इक्विटी) को डिविडेंड दिया जाता है|जब कंपनी घाटे से बंद होती है तब सबसे पहले प्रिफरेंस शेयर केपिटल वापस की जाती है,उसके बाद जो बचे ,उसमें से इक्विटी शेयर  धारकों को प्रमाणानुसार केपिटल चुकाई की जाती है|
सामान्यतः कंपनी  स्वयं   का   हिसाब     प्रतिवर्ष  मार्च  के  अंत    में  बनाकर  शेयर  धारकों को भेजती है|अप्रैल से मार्च तक के वर्ष को फायनेंशियल इयर (FY) कहा जाता है|जबकि जेन्युअरी  से डिसेम्बर तक के वर्ष को केलेंडर वर्ष (CY) कहा जाता है| आयकर  विभाग के नियम के अनुसार प्रत्येक कंपनी को अपनी आय फैनेंसियल इयर (FY) के हिसाब से गिनकर टेक्स भरना जरूरी है|फिर चाहे कंपनी अपना हिसाबी वर्ष (Accounting year) केलेंडर  वर्ष (CY) रखे|कंपनी के लिएअपने हिसाबी वर्ष के अनुसार हिसाब बनाकर और जाँच करके प्रत्येक शेयर धारक को भेजना जरूरी है|

Saturday, December 25, 2010

चंद लकीरें

तेरे नैन ऐसे  नशीले  ,
 तेरे होंठ  ऐसे  रसीले ,
उस पर तेरे कपडे भड़कीले 
फिर  क्यों कोई तुझे न छेड़े 
तेरा यह मदमस्त  आकर्षण  
देता है कितनों को मौन आमंत्रण|

तेरी आँखों में कितनी बार वह प्यार देखने का साहस किया ,
 तेरे गुस्से की दहशत ने हर बार निराश किया|

दिल के दर्द कभी बाहर आने की जुर्रत न करना,
हर बार आकर तुने तूफान को जन्म दिया|

Tuesday, April 27, 2010

मोरे गुरुवर को बेटी उर्फ़ शिष्या की अरज भरी गुहार



- संध्या 'राज' मेहता
मीरा रोड 
D/O बाबुलालजी बोहरा





मोरे गुरुवर को बेटी उर्फ़ शिष्या की अरज भरी गुहार
गुरुवर मोरे मोहे क्यों बिसराई?
सोच सोच अँखियाँ भर आई|
बेटी होत है धन पराई ,
रीत यह जग ने ही बनाई|
महावीर ने जिन धर्म की ज्योत जलाई,
स्थानक-मंदिर प्रथा गुरुओं ने ही बनाई|
मन की लगन,धर्म की अगन, बुझत न बुझाई,
फिर काहे दोष मढ़त, काहे सजा सुनाई|
 शादी-ब्याह नहीं होत सिर्फ खेल- हंसाई,
जन्मों का बंधन है,बंध जाए प्रीत पराई|
तुम संग आस्था, श्रद्धा ,प्रीत बरसों से लगाईं,
बेटी पराई, स्थानकवासी कह पल में ठुकराई|
मात-पिता बिछोह,सुख-दुःख जहन संग लाई,
हर रिश्ते-नाते बहु-बेटी बन निभाई| 
नए संग जोड़ी,पुरानी भी न बिसराई| 
तुमरी सीख अब तक मन-मंदिर में सजाई,

लाज पीहर की रख अनजाने रिश्ते बाँध पाई|
बेटा-बेटी में फर्क नहीं ,क्यों सिर्फ गुहार लगाई?
क्यों स्थानकवासी बेटियां हुईं पराई?
तुमरे आशीष-वचन,दिव्य-दृष्टि क्यों संकुचाई? 
मोरे गुरुवर क्यों की मोहे पराई?
मात-पिता-गुरु सब ही को हम शीष चढ़ाई,
चाहें हम तुमरा आशीष,पलक -पावड़े बिछाई|
महेर करो गुरुवर,दरसन को अँखियाँ तरसाईं,
मुझ संग की जो तुमने,अनजानी दिल-दुखाई,
न कीजो शिष्याओं की श्रद्धा-भावना पराई|
गुरु राजेन्द्र-छबि बचपन से दिल में बसाई,
तुम संग श्रद्दा-आस्था की बीन बजाई,
चौबीस बरस पाल-पौस बेल विकसाई,
सब पंथों संग नाता है जिन-धर्माई,
पर कैसे बसाऊँ यहाँ दूजे को स्थाई|
गुरु तुमरे सुकाज से सदा मन हर्षाई,
तुमरी अस्वस्थता सुन नैनन नीर बहाई,
तुमसे अनजानी बेटियों की धर्म-सगाई,
कैसे टूटे? चाहे करले रस्मों की सगाई|
राजेन्द्र-जयंत-ज्योत बुझत न बुझाई|
महावीर संग गौतम ने प्रीत लगाई,
गौतम ने भी उनसे प्रश्नोत्तरी बनाई|
अब बेटियों के प्रश्नों की बौछार है आई,
गुरुवर मोरे दिल न दुखाओ,ख़त्म करो लड़ाई,
मोरे गुरुवर मोरे रहियो,न करियो मोहे पराई|
 न करियो मोहे पराई| 
- संध्या 'राज' मेहता
मीरा  रोड  

 






Saturday, March 27, 2010

नारी- मन


यह कैसा गम है यह कैसी खुशी है
न मैं दुःख पाती हूँ न मैं सुख पाती हूँ।


जब गम आता पास 
प्रार्थना करता है ईश्वर से इंसान
न मैं प्रार्थना कर पाती हूँ
न गम सहन कर पाती हूँ।
यह कैसा .....

जब यह बेला थी नहीं आयी 
तब मैं नासमझ थी 
अब न नासमझ हूँ,
न मैं समझदार हूँ|| 
यह कैसा.....


बेला है ससुराल जाने की,
मैं ससुराल जा रही हूँ,
न मैं रो रही हूँ,
न मैं हँस रही हूँ|| 
यह कैसा.....

प्रत्येक नारी ह्रदय ही है कुछ ऐसा,
जब तक सामंजस्य न कराले वैसा,
न पीहर छोड़ पाती है,
न ससुराल से जुड़ पाती है|| 
यह कैसा....

यह कैसा मिलन है,
यह कैसी जुदाई है|
इश्वर ने अजब - निराली
रीत यह बनाई है||

यह कैसा गम है, यह कैसी खुशी है||
न मैं दुःख पाती हूँ , न मैं खुश हो पाती हूँ। 
- संध्या 'राज' मेहता

Sunday, February 21, 2010

चंद-शेर

इस जग की बात बड़ी अजब व निराली है।
हर मोड़ पर तड़पाती है यूं ही तरसाती है।
जमाने के संग चलने को खुद को बदलती रही।
सम्पूर्ण बदलाव पर भी, वही पुरानी अपनी कहानी है|| (इस जग...)

दुनिया के हाल पर रोती हूँ, दुनिया मुझे रुलाती है|
जिन्हें चाहती हूँ, ये गम उन्हीं की निशानी है|| (इस जग...)

सोच-समझ के बिना इंसान पागल बन जाता है|
इन सोचों ने ही दी, हमें ये परेशानी है|| (इस जग...)

हमारे शब्द सभी को ज़हर से लगते है|
यह ज़हर तुम्हारे ही विषबाणों का तो प्रहरी है|| (इस जग...)

दूसरों से बनाने में, अपने तन-मन से बिगाड़ी है|
इसीलिए अँगडाई लेकर फिर नई दुनिया सँवारी है|| (इस जग...)

 

आरजू

आरजू
- संध्या 'राज' मेहता

हमने भी कभी चाहा है,
कोई मेरे सिरहाने बैठे,
मेरे बालों को सहलाए,
उनमें उँगलियाँ घुमाए,
बरसों की प्यास बुझ जाए,
इतना दुलार  करे|

हमने भी कभी चाहा है,
कोई मेरी गलतियों को माफ़ करे,
मुझे भी सिर चढ़ाए,
मुझे सपने दिखलाए,
मेरी छोटी ख्वाहिशें पूरी करे,
मुझे बस प्यार ही प्यार करे|

हमने भी कभी चाहा है,
कोई मुझे रूठने पर मनाए,
मेरे साथ खिलखिलाए,
मेरे दर्द सहलाए,
उनका मजाक न बनाए,
मेरी और बस मेरी ही परवाह करे|

हमने भी कभी चाहा है,
प्यार की मीठी तान बजती जाए,
हम-तुम उसमें गोते लागाएँ,
तुम तुम न रहो, हम हम न रहें,
एक दूजे से हम दूर न रहें,
हमारा प्यारा साथ यों ही बरकरार रहे। 
"हमने तो बस इतना ही चाहा है|"
 

Saturday, February 20, 2010

आईपीओ में निवेश और जरूरी सावधानियाँ

आईपीओ में निवेश और जरूरी सावधानियाँ
             शेयर में निवेश करने का एक तरीका आईपीओ (इनिशिअल पब्लिक ऑफरिंग) में अर्जी करना भी है| शेयर के नए ऑफर में छूटक निवेशक एक लाख या उससे कम रकम निवेश कर सकता है| अर्जी देने के पंद्रह दिन में जितने शेयर आपको उपलब्ध हुए होंगे वे आपके डीमेट खाते में आ जाते हैं और बाकि रूपए अपने आप निवेशक के खाते में जमा हो जाते हैं| तीन-चार दिनों में ही इस नए शेयर का लिस्टिंग होता है, तब निवेशक अपने लगे हुए शेयर बेच सकता है| सामान्यतः नए लगे हुए शेयर ऊँची कीमत में आए होने से लिस्टिंग के  दिन ही अगर ज्यादा कीमत मिले तो उन्हें बेचकर नफ़ा कर लेना हितकर होता है|   
             नए शेयर जारी करते समय निवेशकों की अर्जियाँ कई बार जरूरत से कई गुना अधिक आ जाती हैं, छूटक निवेशक के लिए नए जारी किए गए शेयर का जितना भाग अलग से तय किया गया हो उससे भी अधिक शेयर की अर्जियाँ आने की स्थिति में छूटक निवेशकों को भागांश में शेयर दिए जाते हैं| उदाहरण के लिए - यदि एक लाख शेयर छूटक निवेशकों हेतु निश्चित किये गए हों,किन्तु पांच लाख शेयर की अर्जियां आ जाती हैं तो प्रत्येक निवेशक को पांच शेयर की अर्जी के सामने केवल एक ही शेयर मिलेगा|
             सामान्यतः IPO में तीन बीडर होते हैं|(१) QIB (क्वालिफाइड इन्सटीट्युशनल बीडर) (2) NIB (नोन-इन्सटीट्युशनल बीडर) और (3) RIB (रिटेल इनडीवीडयुल बीडर)| इन तीनो वर्गों के लिए नए जारी किए गए शेयर के अलग -अलग भाग रखे जाते हैं | तीनो वर्गों से अर्जियाँ कितनी बार भरी गई हैं, ये अलग से जाना जाता है| तीनो वर्गों की अर्जियाँ मिलकर कुल कितनी बार IPO भरा गया है,यह जानकारी भी मिलती है|तीनों वर्गों को कितने शेयर  मिलेंगे, यह प्रत्येक वर्ग से कितनी बार अर्जियां भरी गयी हैं, उस पर आधारित है| इन तीनों वर्गों में से यदि किसी एक भी वर्ग से अर्जियां पूर्णतः नहीं भरी जाती हैं,तब इस वर्ग के शेयर का भाग दूसरे वर्गों को दे दिया जाता है,जिनमें अर्जियां एक से ज्यादा बार भरी गई हों| QIB   (क्वालिफाइड इन्सटीट्युशनल बीडर) वर्ग को अर्जी करते समय केवल १० % मार्जिन रकम ही भरनी पड़ती है| कोई कंपनी अर्जी भरते समय २५ % या उससे कम रकम भी मंगवाती है| बाकि रकम एलोटमेंट के समय रिफंड में से काट ली जाती है या थोड़ी बची हुई रकम भविष्य में कॉल के रूप में मँगवायी जाती है, इन्हीं शर्तों पर शेयर अलॉट किये जाते है| ऐसे समय में जारी किए गए शेयर पार्टली पेड (अंशतः चुकते) होते हैं| ऐसे शेयर भी शेयर बाजार में अंशतः चुकते (पार्टली पेड) के रूप में लिस्टेड होते हैं|
                    
IPO दो प्रकार के होते हैं - १.बुक बिल्ड ऑफर्स २.फिक्स्ड प्राइज  ऑफर्स 

बुक बिल्ड ऑफर्स - इसमें दो कीमतें शेयर की  अर्जी के लिए दी जाती है| - १.फ्लोर प्राइज (FLOOR PRICE) ~ यह शेयर की न्यूनतम कीमत होती है| 
२.कट ऑफ़ प्राइज (CUT OFF PRICE) ~ यह शेयर की  ज्यादा से ज्यादा कीमत होती है| 
                    
निवेशक फ्लोर प्राइज अथवा उससे ज्यादा कीमत देकर अर्जी कर सकता है| यदि निवेशक ज्यादा से ज्यादा जो कीमत होती है उसके लिए अर्जी करता है तबभी जिस कीमत से शेयर जारी किए गए हों, उसी कीमत से उसे शेयर मिलते हैं| इसके लिए अर्जी के फार्म में निवेशक को CUT OFF पर निशान करना चाहिए|
फिक्स्ड  प्राइज़ ऑफर्स - इसमें  जारी किए गए शेयर की एक ही

कीमत तय रहती है|

-शेयर की अर्जी HUF (हिन्दु  अन डिवाइडैड फेमिली ) भी कर सकती है|

-HUF स्वयं कर्ता के रूप में भी अर्जी कर सकता है|  

-शेयर  की अर्जी पार्टनरशिप फर्म नहीं कर सकती है| 

-शेयर  की  अर्जी के लिए बीड लाट दर्शाया जाता है| निवेशक  को कम से कम एक लाट के लिए अर्जी करनी पड़ती है|ज्यादा से ज्यादा इतने लाट के लिए अर्जी करनी चाहिए,जिससे अर्जी की रकम 1,00,000 से ज्यादा न हो|अर्जी की रकम यदि १,००,००० से ज्यादा बढ़ जाती है तो उसे रिटेल(छूटक) निवेशक नहीं गिना जाता है|

शेयर के इश्यू (जारी किए शेयर ) में अर्जी करके शेयर प्राप्त करने के कितने ही फायदे हैं,जैसे कि-अर्जी करने के पश्चात पंद्रह दिन में ही आपका पैसा या शेयर आपके डीमेट खाते में या बैंक खाते में जमा हो जाते हैं|यदि कंपनी का शेयर इश्यू ज्यादा भर जाता है तो निवेशक को केवल थोड़ी ही रकम के शेयर प्राप्त होते हैं,बाकि की रकम पुनः मिल जाती है|इस स्थिति में निवेशक की जोखिम भी बहुत कम हो जाती है| उदाहरण के लिए मान लो कि रिटेल भाग दस बार भर जाता है तो निवेशक को १,००,००० रु. की अर्जी में से केवल दसवें भाग के यानि १०,000 रु. के शेयर ही मिलते हैं| बाकि  के ९०,००० रु. का रिफंड उसके बैंक खाते में जमा हो जाता है|यदि बाशयेर बाजार अर्जी करने के पंद्रह दिनों में नीचे गिरता है तो भी निवेशक को १०,००० रु. के शेयर पर ही जोखिम उठानी पड़ेगी|यदि १,००,००० रु. शेयार बाजार में रोके होते तो जोखिम भी उतनी ही बढ़ जाती|

शेयर की अर्जी करने के पश्चात यदि तुरंत ही शेयर बाजार अत्यधिक गिर जाता है तो चेक पास होने के पहले ही निवेशक स्टॉप पेमेंट करवा सकते हैं| सी अवस्था में निवेशक को शेयर नहीं दिये जाते हैं और पूरी रकम पुनः मिल जाती है|चेक पास होने के पश्चात और शेयर मिलने के पहले यदि शेयर मार्केट नीचे गिरता है और निवेशक यदि शेयर लेना नहीं चाहता है,तब एक पत्र लिखकर शेयर एलोट न करने हेतु वह आवेदन कर सकता है|इस आवेदन पत्र के मिलने के पश्चात निवेशक को शेयर एलाट नहीं किए जाते है और  उसे पूरा रिफंड दिया जाता है| 
इस प्रकार निवेशक IPO में स्वयं की जोखिम कम कर सकता है| कभी-कभी अंदाज से जितने श्येर एलाट होने की संभावना होती है,वे OFF MARKET (आफ मार्केट) में PRIMIUM (प्रीमियम) से बेचकर भी संभावित नुकसान (हानि ) से बचा जा सकता है इस प्रकार आईपीओ में  अर्जी करके निवेशक कम से कम जोखिम उठाकर ज्यादा व अच्छा लाभ कमा सकता है|इसके अलावा निवेश केवल एक महीने से भी कम समय हेतु करने से पैसे की तरलता भी रहती है|
लेखक-राजेंद्र एच. मेहता (C.A.)
अनुवादक- डा. संध्या 'राज' मेहता


Monday, February 8, 2010

शेयर बाजार : - शेयर के सोदे के पूर्व की सावधानियाँ



शेयर बाजार : -
1.शेयर के सोदे के पूर्व की सावधानियाँ 


          शेयर खरीदने - बेचने से पूर्व बहुत सी जानकारी होना जरूरी है| सम्पूर्ण जानकारी के बिना शेयर बाजार में निवेश करने से नुकसान होने की संभावना रहती है| इसलिए प्रत्येक निवेशक को सम्पूर्ण जानकारी ले लेनी चाहिए|

           मुख्यतः भारत में एन.एस.इ. और बी. एस इ. स्टॉक एक्सचेंज पर शेयर के सोदे होते हैं| आजकल दोनों स्टॉक एक्सचेंज सुबह ९ बजे खुल जातें है  और दोपहर ३:३० बजे तक शेयर के सोदे होते हैं| सोदा करने के लिए क्लायंट  कोड देना होता है, जिसमें सोदा करना है| गलत कोड में सोदा होने पर नुकसान निवेशक को होता है| यदि  डे ट्रेडिंग में सोदा करना है तो सुबह जिस एक्सचेंज में खरीदने का सोदा किया हो, उसी में बेचने का सोदा भी करना चाहिए ,नहीं तो शेयर की नीलामी एक एक्सचेंज में होगी और डिलीवरी के पैसे दूसरे एक्सचेंज में देने पड़ेंगे|


            यदि बेचने का सोदा किया हो तो निवेशक को शेयर की डिलीवरी स्वयं के खाते में से शेयर दलाल को देना जरूरी है,नहीं तो शेयर की नीलामी हो जाती है| 
            ऐसा नुकसान न हो, इसलिए शेयर दलाल के पास ही निवेशक को अपना डीमेट खाता खुलवाना चाहिए|
ऐसा करने से निवेशक अपने समय, शक्ति और नुकसान को बचा सकता है| शेयर खरीदने के पश्चात शेयर की डिलीवरी स्वयं के डीमेट खाते में आ गई हो तो ही बेचने के सोदे देना चाहिए, अन्यथा शेयर की नीलामी हो सकती है और नुकसान निवेशक को ही भुगतना पड़ता है| 

             शेयर में राइट्स,बोनस या डिविडेंड घोषित हो तो उसका रिकार्ड तारीख  और बुक बंद होने की तारीख जानने के पश्चात ही निवेशक को शेयर खरीदने या बेचने का निर्णय लेना चाहिए| यदि निवेशक ने कम-बोनस, कम-राइट्स या कम-डिविडेंड  में शेयर  खरीदें हों  तो ही वह बोनस ,राइट्स या डिविडेंड का हकदार है| एक्स  बोनस , एक्स राइट्स या एक्स डिविडेंड शेयर खरीदने वाले को बोनस ,राइट्स या डिविडेंड नहीं मिलता है| उसको इसके लिए कीमत भी कम देनी पड़ती है| बहुत बार शेयर स्प्लिट होते हैं| उदाहरण के तौर पर सौ रूपए का एक शेयर दस -दस रूपए के दस शेयर में बदल जाते हैं| आपके डीमेट खाते में अपनेआप एक शेयर के बदले दस शेयर आ जाते हैं|
शेयर का भाव भी दसवें भाग का हो जाता है| बोनस या डिविडेंड भी अपनेआप आपके डीमेट खाते में या बेंक खाते में आ जाता है| 

            शेयर की कंपनी बोनस या डिविडेंड के लिए आवश्यक जानकारी आपके डीमेट खाते में से लेती है| अतः आपके डीमेट खाते का पता और बैंक खाता  जरूरत पड़ने पर बदलते रहना चाहिए| 

       यदि निवेशक के पास फिज़िकल शेयर हों तो वे स्वयं के नाम पर है कि नहीं उसका ध्यान रखना चाहिए| पता विशेष रूप से देख लेना चाहिए अन्यथा राइट्स, बोनस या डिविडेंड शेयर पुराने पते पर कंपनी भेजेगी और आपको वे  मिलेंगे नहीं| ऐसे नुकसान से बचने के लिए निवेशक को सारे फिज़िकल शेयर डीमेट करवा लेना चाहिए| ऍसा करने से बोनस या डिविडेंड अपने आप आपके डीमेट खाते या बेंक खाते में आ जायेंगे| निवेशक को डिविडेंड स्वयं के खाते में अपनेआप लेने के लिए (ECS) इलेक्ट्रानिक क्लियरिंग सिस्टम की सुविधा लेनी चाहिए| शेयर में जब राइट्स मिलता है तब वह लेने के लिए निवेशक को निवेदन करना पड़ता है| आपको मिले हुए राइट्स के अलावा ज्यादा शेयर हेतु भी आप निवेदन कर सकते हैं |यदि निवेशक को राइट्स के लिए निवेदन करके शेयर में निवेश करने की इच्छा न हो तो    राइट्स शेयर निवेदन करने के पहले ही बेच सकता है| सामान्यतः राइट्स के सोदे स्टॉक एक्सचेंज पर नहीं होते हैं| निवेशक को स्वयं या स्वयं के दलाल के द्वारा राइट्स बेचने पड़ते  है| इसके लिए निवेशक को राइट्स के निवेदन पर हस्ताक्षर करके खरीददार को देना पड़ता है| 

      शेयर पूर्णतः चूकता या अंशतः चूकता हो सकते हैं| दोनों प्रकार के शेयर शेयर बाजार में सूचीबद्ध हो सकते हैं| शेयर बेचते समय निवेशक को स्वयं के शेयर पूर्णतः चूकता या अंशतः चूकता हैं,यह जान लेना चाहिए| इसके बाद ही बेचने का सोदा शेयर दलाल को देना चाहिए| बहुतसे शेयर के नाम एक -दूसरे से मिलते - जुलते होते हैं| अतः उनके नाम में किसी भी प्रकार का संशय हो तो सोदे के पहले ही उसकी निश्चिंतता कर लेनी चाहिए| शेयर  का ISIN नंबर और उसका कोड नंबर जानकर यह संशय दूर कर सकते हैं|
डीमेट खाते में शेयर के नाम के साथ ISIN नंबर मिलता है|

निवेशक यदि इन सब प्रकार की जानकारी लेने के पश्चात सोदा शेयर दलाल को देता है ,तो उसे व्यर्थ परेशान नहीं होना पड़ता| निवेशक स्वयं को फालतू नुकसान से भी बचा सकता है| शेयर दलाल के साथ भी किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न नहीं होगी| शेयर दलाल के साथ उसके मधुर सम्बन्ध बने रहेंगे| उसके निवेश पर पूरा-पूरा लाभ मिलेगा| स्वयं  के निवेश के बारे में वह निश्चिन्त होकर अपना कीमती समय दूसरी जगह दे सकता है| बाद में उसे पछताना नहीं पड़ता है| स्वयं के निवेश के बारे में स्वयं को जानकारी है इसका संतोष मिलता है| निवेशक की गैरहाजिरी में उसके परिवार के लोगों को तकलीफ नहीं होती है और उन्हें सच्चे अर्थ में निवेश उपयोगी सिद्ध होगा|

Friday, February 5, 2010

शेयर बाजार - मूलभूत जानकारी





शेयर बाजार - मूलभूत जानकारी                           
                                                                - राजेंद्र मेहता (चार्टर्ड एकाउंटेंट)     


आज शेयर  बाजार सबके लिए आकर्षण का केंद्र बिंदु है  शीघ्र पैसा कमाने की चाह में कई लोगों के बर्बाद होने के उदाहरण  भी देखने - सुनने को मिलते हैं| क्या शेयर बाजार में निवेश (इन्वेस्ट) करने में खतरा है ? योग्य मार्गदर्शन और योजनाबद्ध निवेश से कई लोगों ने अपनी  किस्मत चमकाई  है| ऐसे उदाहरण भी समाज में मौजूद हैं| ऐसा नहीं है कि शेयर बाजार में लाखों रूपया होने पर ही निवेश कर सकते हैं| छोटे इन्वेस्टर भी इस बाजार में निवेश करके अपना भविष्य बना सकते हैं| 'खबरें आज तक' पत्र शेयर बाजार में  नए प्रवेश करने वालों तथा पुराने निवेशकों के मार्गदर्शन हेतु एक नए     कॉलम  की शुरुआत कर रहा है| चार्टर्ड एकाउंटेंट राजेंद्र मेहता सफल इन्वेस्टमेंट कंसल्टेंट भी हैं ,जिनके अनुभव की कलम का लाभ पाठकों को प्रति सप्ताह मिलता रहेगा|    
       
प्रत्येक व्यक्ति स्वयं की बचत को निवेश (इन्वेस्ट) करना चाहता है| निवेश पर आकर्षक लाभ (मुनाफ़ा) मिले ,निवेश में तरलता हो , तथा समझने में सरल हो ये  सभी निवेशक चाहतें हैं| निवेश जमीन ,घर ,सोना ,चांदी ,एन.एस.सी.,कंपनी या बैंक में फिक्स्ड- डिपोजिट, कंपनी के डिबेंचर्स , बोंड्स या शेयर में किया जा सकता है| शेयर में निवेश करने के कई फायदे हैं|


            जैसे कि -  शेयर थोड़े - थोड़े व अलग - अलग कंपनी के ले सकते  हैं| -शेयर   डीमेट अकाउंट में होने से संभालने में समय और खर्चा नहीं होता है| जबकि जमीन ,घर या सोने में संभालने में समय का अपव्यय व धन खर्च होता है| -जमीन ,या घर स्वयं के नाम करने में स्टेम्प - ड्यूटी रजिस्ट्रेशन  जैसे खर्च करने पड़ते हैं ,वहीं सोना-चांदी चोरी होने का भय रहता है| जमीन या घर में निवेश हेतु एक साथ बड़ी रकम की जरुरत होती है ,जबकि शेयर खरीदने में इसकी जरुरत नहीं| -शेयर जितनी जरुरत हो उतने बेचे जा सकते हैं और थोड़े  ही समय में पैसे मिल सकते हैं| जमीन या घर एक साथ पूरा बेचना पड़ता है और पैसा मिलने में भी समय लगता है|  -शेयर की  निर्धारित कीमत आसानी से जानी जा सकती है और कम समय में व्यवस्थित तरीके से बेच सकते हैं|घर या जमीन में ऐसा संभव नहीं|   - शेयर में लम्बी अवधि तक निवेश रोकने पर अच्छा लाभ मिलता है जो फिक्स्ड-डीपोजिट्स, डिबेंचर्स, बोंड्स, इत्यादि में नहीं मिलता है| - शेयर यदि एक वर्ष पश्चात मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज के तहत बेचा जाए तो आयकर में सम्पूर्ण छूट मिलती है|एक वर्ष के अन्दर शेयर बेचने पर भी आयकर में केवल १५% पूंजी वृद्धि कर (Capital Gain Tax) भरना पड़ता है| दूसरे किसी निवेश की आया पर यह छूट नहीं मिलती है| बोंड ,डिबेंचर या फिक्स डिपोजिट के ब्याज में से कर - कटौती (टी.डी.एस.) अपने - आप हो जाती है| - शेयर पर वार्षिक डिविडेंड की आय पर कर में भी सम्पूर्ण छूट है|  जबकि फिक्स्ड  डीपोजिट्स, डिबेंचर्स या एन.एस.सी.के ब्याज पर आय कर भरना पड़ता है| पी.पी.ऍफ़.का ब्याज करमुक्त  है , परन्तु एक  व्यक्ति ७० हजार से ज्यादा निवेश इसमें नहीं कर सकता है|


       शेयर की खरीद -बिक्री पर स्टॉक एक्स्चेंग पूरा ध्यान रखता है| निवेशकों के हित में नियम बनाकर शेयर दलालों को उनका पालन करने की हिदायत देता है| शेयर दलालों के हिसाब का आंकलन करना ,निवेशकों एवं दलालों के बीच झगड़े का निवारण करना ,कोई शेयर दलाल के दिवालिया होने पर निवेशकों को हानि न होने पाए इसके लिए शेयर बाजार के  निवेशक प्रोटेक्शन फंड में से  हर्जाना दिलवाना जैसी अनेक सुविधाएं शेयर निवेशकों हेतु है| बी.एस. इ. , एन.एस.इ.अथवा किसी भी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्स्चंज द्वारा निवेशकों को कानूनी करारनामा मिलता है जिसमें निवेशकों के सभी हितों का रक्षण होता है| शेयर बेचने के तीसरे दिन ही निवेशक को उसका पैसा मिल जाता है| 


   ऊपर बताए अनुसार सभी आवश्यक जानकारी के पश्चात जिस व्यक्ति के पास स्वयं का घर ,जरूरी सोने के गहने और अन्य जरूरी बचत करने के बाद बचे हुए पैसे  शेयर  में निवेश करना हो , उसे कैसे आगे बढ़ना चाहिए ? यह जानना भी जरूरी है| 


    शेयर में निवेश करने के लिए जानकार व्यक्ति की सलाह लेकर ही आगे बढ़ना चाहिए| निवेशक देश के किसी भी कोने से शेयर में निवेश बी.एस.इ.और एन.एस इ. द्वारा कर सकता है| इसके लिए सर्वप्रथम निवेशक को एक डीमेट खाता और एक बैंक का खाता खुलवाना जरूरी है| इसके साथ ही किसी भी शेयर दलाल के पास  क्लाइंट रजिस्ट्रेशन भी कराना जरूरी है| डीमेट अकाउंट शेयर दलाल के पास खुलवाने से शेयर बेचते समय अपनेआप  आपके खाते में से दूसरे के खाते में बदली हो जाते हैं| किसी भी प्रकार की ट्रांसफर स्लिप देने की जरूरत नहीं पड़ती है| समय ,   मेहनत और शेयर नीलामी के समय फालतू खर्चे बचते हैं|  कोई भी व्यक्ति जितने चाहे, डीमेट अकाउंट खुलवा सकता है| डीमेट खाता खुलवाने के लिए पेन- कार्ड जरूरी है ,इसके अलावा घर के  पते के सबूत के लिए जरूरी दस्तावेज भी देने पड़ते हैं| बैंक अकाउंट तो जरूरी है ही ,एच.यु .ऍफ़. भी डीमेट अकाउंट खुलवा सकता है| 


    शेयर खरीदी के लिए नगद रूपया नहीं दे सकते| आपको अपने खाते में से चेक ही देना पड़ता है| यह खाता भी शेयर दलाल के पास मान्यता प्राप्त होना चाहिए| बिक्री के समय भी शेयर दलाल अकाउंट पेयी चेक द्वारा ही पैसे चुकाता है| खरीदी या बिक्री के समय दलाली ,  एस.टी.टी.(सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टेक्स ) और अन्य दूसरे कानूनी टेक्स  लगते हैं| शेयर दलाल कांट्रेक्ट नोट बिल और आपका खाता आपको देने हेतु बाध्य है|| शेयर की खरीदी - बिक्री  आन लाइन भी कर सकते हैं|    


      निवेशक को मुख्यतः लम्बी अवधि के लिए शेयर की  खरीद -बिक्री करना चाहिए| एक ही दिन में खरीदकर बेचना डे - ट्रेडींग कहलाता है| डे - ट्रेडींग में मुनाफा या नुकसान का चेक दलाल को देना -लेना पड़ता है| इसके सिवाय (F&O) फ्यूचर और ऑप्शन द्वारा भी सोदा हो सकता है| जिसमें केवल मार्जिन देकर शेयर खरीद बेच सकते हैं| F&O में शेयर की फिजिकल डिलीवरी देनी या लेनी नहीं पड़ती है|  F&O या डे ट्रेडींग के प्रोफिट पर आयकर में कोई छूट नहीं है| इस प्रकार के सोदे को सट्टे  का नाम दिया जा सकता है| सच्चे निवेशक को इन सबसे दूर ही रहना चाहिए| निवेशक को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि उसका शेयर दलाल किसी भी प्रकार के सट्टे को उत्तेजित तो नहीं कर रहा है| यदि ऍसा है तो दलाल बदल देना चाहिए ,क्योंकि सट्टे से लम्बे समय में समय और पैसा बर्बाद होता है| 


     निवेशक पोर्टफोलियो मेनेजमेंट स्कीम (PMS) द्वारा भी निवेश कर सकते हैं| इससे आपको निवेश हेतु  स्वयं समय नहीं देना पड़ता है ,निवेशक  जितनी रकम पोर्टफोलियो मेनेजमेंट स्कीम में निवेश करता है ,उसके शेयर की खरीद - बिक्री का कार्य शेयर दलाल संभालता है| निवेशक को उसका हिसाब दिया जाता है| फ़ायदा या नुकसान भी निवेशक का ही होता है| परन्तु विशेष जानकारी और ज्ञान के  कारण शेयर दलाल को निवेश के लाभ  का अमुक भाग देने के उपरांत भी निवेशक को उसके निवेश पर अच्छा लाभ मिलने की संभावना बढ़ जाती है|






- अनुवादक - गुजराती से हिंदी  
- संध्या 'राज' मेहता

Wednesday, February 3, 2010

चाँद मेरे - Hindi Kavita



चाँद  मेरे   
तेरी आहट से संध्या अपने में सिमट जाती है , 
 
तेरे आने से निशा शर्माती है ,                        
  
तुझे देख चांदनी मुस्काती है ,

पर तेरे जाने से उषा आंसू बहाती है |


-डॉ.संध्या'राज'मेहता 
                                   मीरा रोड  
mob. - 9769428293     



नारी शक्ति Hindi Poem

नारी शक्ति

नारी तुम शक्ति ,शौर्य ,साहस ,
त्याग की मूरत प्यारी हो |
तुम्हीं लक्ष्मी ,सरस्वती ,सीता .सावित्री ,
तुम्हीं काली कलकत्ते वाली हो |
पुत्री ,बहन ,पत्नी ,माता हो या सखा ,
हर रूप में तुम निराली हो |
तुमसे ही घर स्वर्ग है ,
तुम इस स्वर्ग की चार दीवारी हो |
तुम हो तो हर दिन दीवाली है ,
वरना दीवाली भी केवल अमावस काली है |
                              
डॉ.संध्या'राज'मेहता 
                                   मीरा रोड    
                mob-9029208468

Thursday, January 28, 2010

आत्महत्या -कायरता


  
                 




 डॉ.संध्या'राज'मेहता 
                                 मीरा रोड                                                             आत्महत्या -कायरता                                             
" देश के भावी , नन्हें वीर जवानों
   जीवन का मूल्य पहचानो "

प्यारे बच्चों ,

गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय त्यौहार बधाइयों और शुभकामनाओं के आदान -प्रदान के साथ प्रतिवर्ष यह याद दिलाकर जाता है  कि यह देश तुम्हारा है, तुम इसकी धरोहर हो, इसका सुनहरा भविष्य तुम ही हो |

आज बच्चों ने आत्महत्या का जटिल प्रश्न देश के सामने खड़ा कर दिया है  देश के महान शहीदों ने अपना जीवन बलिदान कर  तुम्हें स्वतंत्र भारत का उपहार दिया व   तुम्हें अपनी थाती सौंपी। अब तुम्हें अपना  कर्तव्य निभाना है,न कि व्यर्थ जीवन गवांकर देश की धरोहर का अंत कर दो | तुम्हें यह अधिकार किसने दिया ?

       देश के भावी युग-निर्माता विद्यार्थियों ने आत्महत्या का जो सिलसिला शुरू किया है उसे बस अब यहीं रोकना है |यह जीवन जीने को भले ही तुम्हारा है पर इस पर जितना अधिकार तुम्हारा है ,उतना ही तुम्हारी जननी यानि माता और भारत माता का भी है |

"जो भरा नहीं भावों से
बहती जिसमें रसधार नहीं,
वह ह्रदय नहीं पत्थर है
जिसे  स्वदेश से प्यार नहीं |"

साथ ही आज के सन्दर्भ में यही कहूंगी --

"वह ह्रदय नहीं पत्थर है
जिसे  स्वयं से प्यार नहीं |"

        उम्र के जिस पड़ाव पर बच्चों ने आत्महत्याएं कीं ,वहां तक कितनी ही मुसीबतें झेलकर माता -पिता ने उन्हें पाल -पोसकर बड़ा किया होगा |बीमार होने पर कितने ही देवी - देवताओं की मन्नत रखी होगी,कितने डॉक्टरों से इलाज करवाया होगा |उनके जीवन के अंत के बाद माता -पिता की आँखों के अश्रु सुखने का नाम न लेते होंगे , कौन बनेगा उनका संबल?कैसे मिलेगी उन्हें सांत्वना? 
  क्या इन प्रश्नों के उत्तर किसी के पास है ?जो इन प्रश्नों
पर गौर करेगा ,वह शायद कल्पना में भी आत्महत्या का विचार नहीं करेगा |
         आत्महत्या करने वाले अधिकतर बच्चे मध्यम वर्ग से हैं | अतः एक कारण यह भी नजर आता है कि निम्न वर्ग को अपने श्रम यानि हाथों की  ताकत पर भरोसा है व उच्च वर्ग को अपने धन यानि पूंजी की ताकत पर  | माध्यम वर्ग के बच्चे दोनों में अपने आपको गौण पाते हैं| बस यही कमजोरी उन्हें हताश व निराश करती है,परन्तु आत्महत्या समस्या का समाधान नहीं | 
         धार्मिक मतावलंबियों के अनुसार फिर उन्हें पुनर्जन्म लेना है, फिर पढाई करना हैऔर नए सिरे से यहाँ तक पहुँचने के लिए संघर्ष करना है|फिर भला यह मार्ग क्यों चुनें?यह   कायर लोगों का मार्ग है| वीरता का इतिहास रचने वाले भारत देश के सपूतों को यह कर्म शोभा नहीं देता |तुममें तो इतनी शक्ति है कि -
"अगर तुम ठान लो तो 
तारे गगन के तोड़ सकते हो ,
अगर तुम ठान लो तो
रुख हवा का मोड़ सकते हो|"

      अतः दृढ़ संकल्प और विश्वास की आवश्यकता है|परीक्षा तो क्या जीवन के हर कठिन समय में संयम,लगन और साहस तुम्हारा संबल बनेगा | 

           फिल्मों को देखकर यदि आज की युवा पीढ़ी गलत राह पर चल निकलती है और एक बच्चे की नक़ल दूसरे बच्चे भी करने लगे तो यह सरासर  गलत है | 
             हर सिक्के के दो पहलू होते हैं| हमें हर बार उजला पहलू ही देखना है | चाकू का प्रयोग स्वादिष्ट फलों के रसास्वादन के लिए भी होता है और उसी चाकू से किसी की ह्त्या भी की जा सकती है | यह तो उसके प्रयोग करने वाले पर निर्भर है कि वह उसका सदुपयोग करे या दुरुपयोग |   
        जिन फ़िल्मी कलाकारों को बच्चे पसंद करते हैं ,उनके बारे में सोचें तो जैसा कि चित्रलेखा के जनवरी के तृतीय अंक में बताया है,दीपिका पादुकोण,केटरीना कैफ ,करीना कपूर व अक्षय खन्ना आदि भी ज्यादा शिक्षित नहीं हैं |     स्नातक न होते हुए भी इन्होंने  कला ,मेहनत और लगन से अपनी मंजिल प्राप्त की | 
        उच्च  शिक्षा जीवन में बहुत महत्व रखती है ,लेकिन जीवन से बढकर तो  कुछ  नहीं | यदि हमारा चरित्र और ध्येय उज्जवल है तो मंजिल पाने से कोई नहीं रोक सकता | 
        प्रिय बच्चों ,यदि जीवन में थोड़ी भी निराशा है तो उसे निकाल दो और हिम्मत,लगन,धैर्य व अपने बाहुबल परआत्मविश्वास के साथ पुनः प्रयास करें |     
        किसी ने सच कहा है -"यदि हम गलत दिशा में बहुत दूर निकल गए हैं, तब भी सही दिशा में जाने के लिए हमें उतना ही नहीं चलना है, बस पलटना भर है और हम सही दिशा में होंगे|"     

      इस    ज्वलंत  समस्या  के समाधान के लिए बच्चों, माता-पिता ,शिक्षक एवं शिक्षा विभाग सभी को मिले-जुले प्रयास करने होंगे |  
 - माता-पिता को यथासमय बच्चों की पढ़ाई का निरीक्षण करना होगा | उनकी समस्याओं को सुनना एवं उनका हल निकालना होगा | कुछ समस्याएँ केवल सुनाने से ही   दिल से निकल जाती हैं वरना दर्द बनकर नासूर बनते देर नहीं लगती |
       प्रत्येक बच्चे को पढाई के साथ- साथ किसी एक खेल व कला में निपुण होना होगा | पढाई में कमजोर होने पर विशेष रूप से इस बात का ध्यान रखना होगा |         पढाई के साथ जीवन में योगा व  मेडिटेशन (ध्यान ) का नियमित अभ्यास करें तो यह समस्या उपस्थित ही नहीं होगी |
   परीक्षा- प्रश्नपत्रों  के बीच एक -दो दिन अवकाश रखने से यदि समस्या का हल संभव हो तो शिक्षा विभाग को
 इस ओर अतिशीघ्र  ध्यान देना चाहिए |
                               ईश्वर की  अदभूत रचना से घृणा कर जीवन - ज्योत बुझाने की उल्टी गंगा बहाना घोर पाप है | अतः इस नवयुग में उमंग व उल्लास के साथ सुखद नवीन विचारों से सबके जीवन में  अपनी मुस्कान से रोशनी भर दो |
 "बिखेरो तुम नई मुस्कान 
      फिर जग में नया सवेरा हो 
घृणा का पाप धोकर 
       स्नेह धारा  में नहाओ तुम,
  नए  युग में विचारों की 
 नई गंगा बहाओ तुम |"
  भारत के वीरों ने सिंह की तरह दहाड़कर अंग्रेजों को भगाया था |भगत सिंह ,रामसिंह ,फतेहसिंह आदि नामों में 'सिंह' शब्द वीरता का ही प्रतीक है | ऐसे वीरों के देश में निराशा की भावना पनपना व जीवन गंवाना सियार की तरह समस्या से डरकर भागना है |   
" जागो फिर एक बार 
सिंहों की माँदों में
आया है एक सियार 
जागो फिर एक बार |"
हमारा राष्ट्रीय त्यौहार गणतंत्र दिवस मनाना व देश के शहीदों को श्रद्धांजली देना तभी सार्थक होगा , जब हम यह प्रण करें कि हम उनकी कुर्बानी को व्यर्थ न जाने देंगे | उन्हीं की तरह वीर बनकर हर समस्या का मुंहतोड़ जवाब देंगे | देश की रक्षा की जो जवाबदारी हमें सौंपी है, उसका निर्वाह करेंगे | यों जीवन से हताश - निराश होकर अपनी जननी और जन्मभूमि को कभी लज्जित नहीं करेंगे | माँ एवं मातृभूमि के कर्ज चुकाने की शपथ के   साथ -
            जय  भारत ,जय  महाराष्ट्र |    
  - डॉ संध्या 'राज' मेहता 
मीरा रोड (ठाणे)

mob-9769428293

Saturday, January 9, 2010

भारत माता की पुकार जनता व राहुल के नाम

भारत माता की पुकार
जनता व राहुल के नाम
                                         
                                                                                   -डॉ. संध्या 'राज' मेहता
                                                          मीरा रोड (इ) 

लहू की हर एक बूंद में जोश है,
नवीन हर उत्साह नवीन हर होश है |

प्रधान पद के कर्ता-हर्ता
नेता कई अनेक हैं,
देश दुलारा राजीव-प्यारा
 राहुल केवल एक है |

"जनतंत्र से बना न्यारा
भारत प्यारा देश हमारा |"

गर यह विरल नारा
गगन गुंजित करना है,
आतंकवाद को देश से
विश्व से गर हरना है,
पुनर्निर्माण कर देश का
उज्जवल भविष्य बुनना है,
चुनिए राष्ट्र का तारणहारा
सबसे न्यारा राहुल प्यारा |

पितृ के आतंकवादी सर्प दंश को
बेटे ने ही कुचलना है,
गर   नारी शक्ति राष्ट्र में
पुनः जाग्रत करना है,
इंदिराजे के लाडले पोते
राहुल को जगाना होगा |
गर धर्मनिरपेक्षता के पर्चे
पुनः बुलंद करना है,
सोनियाजी के चहेते बेटे
राहुल को आगे बढ़ाना  होगा |

दादी के हत्यारों को
राहुल  भूला न  पाएगा,
पापा की यादों को
दिल में पुनः जगाएगा,
नवपीढी का नवनिर्माता बन
नवयुग में नव सृजन करेगा |
प्रगति पथ में बाधक
अशिक्षा,अन्याय, अत्याचार,हरेगा |
रिश्वतखोरी,बेकारी,बेईमानी,
हर बीमारी का इलाज करेगा |
देश को सही मायने में
स्वतंत्र जनतंत्र बनाएगा |

हे राहुल न्यारे,
राजीव-लोचन तारे,
भारत माता तुम्हें पुकारे,
आह्वान करते मतदाता सारे |

प्रधान पद अब तुम संभालो,
राजनीति को धर्ममय बनादो,
नवपीढ़ी में नवचेतना भरदो,
वैश्विक आर्थिक मंदी को हर दो,
राष्ट्रभक्ति भावना तन-मन में धर दो,
भारत माता को आज एक वर दो |

"समाज-उद्धारक,  दीन-दलितों का सहारा
बनेगा सदा तुम्हारा राहुल दुलारा |"