Thursday, April 30, 2020

मामाश्री कांतिलालजी भंडारी को भावपूर्ण श्रद्धांजली संग सादर समर्पित

मामाश्री कांतिलालजी भंडारी को भावपूर्ण श्रद्धांजली संग सादर समर्पित

सहज संपन्न,सरस गायक,
सौम्य स्वभाव, मधुर-भाषी,
सरल व्यक्तितव् के धनी,
सरस मुस्काते मेरे कांति मामा थे वो।

सबको प्यारे सबके लाडले,
माँ  के चहेते  भ्राता थे वो।

बचपन से देखा , उनकी प्यारी स्मित को ,
वो फुग्गे पाड़कर बाल बनाने की रीत को। 

जग में अनूठा मामासा का व्यवहार था ,
मेघनगर आते ही नागदा आना हर बार था।
 
नौकरी के लिए बाहर  जाना उनको मंजूर था ,
पर परिवार से दिल का नाता नहीं दूर था।

कोई महीना खाली नहीं जाता ,
 जब कोई उनका पत्र नहीं पाता।

उनके सुन्दर अक्षरों वाला पत्र पढ़ने सब उत्सुक रहते,
पत्रलेखन की अनोखी कला से सबको  गदगद  करते ।

केवल हॉल चाल नहीं, पूरे माह के  कार्यों का ब्यौरा होता ,
म्होटी  बेन को सब हॉल बताने को उनका मन बावरा रहता।

 मेघनगर या नागदा मिलने का मौका ढूँढ़ते
 मिलने पर देर रात तक गपशप के माहौल चलते।

जाते वक्त नाजुक ,भावुक मन , मन ही मन रोता ,
दूर रहने का गम ,सदा आँखों से कहता।

पर मामीसा के साथ -सहकार से तसल्ली पाते ,
सही मायने में मानो  प्रेम के प्रेम में गोते लगाते।

शहर शहर घूम, दोहद मुकाम पाना  ,
बिटिया के प्यार सानिध्य संग पुनः रतलाम घर बसाना। 

दूर दृष्टा थे , मन मोहना थे  वो ,
जीवन जीने की कला के ज्ञानी थे वो।

मामीसा की धर्म आराधना के अनुमोदक थे ,
तपस्या में सहयोग कर अनुमोदना तप आराधक थे।

याद आती है वो गर्मियों की छुट्टियाँ
पुअर दो माह मेघनगर में बिताना।


फिर राखी पर जाना, पर्युषण करके आना , 
खुशनसीबी हमारी,इतने मामा मासियों का प्यार पाना।
अब कहाँ नसीब , वो गर्मियों में मामा घर जाना।

अस्वस्थ होने पर भी बहन को मिलने ,
 तबियत पूछने ,दौड़ दौड़ कर जाना ,
भाई बहनों के प्रति प्रेम की गंगा बहाना,
प्रेम की कांति का प्रकाश फैलाना ,
यही था कांति के प्रेम का फ़साना।   

भानजी -डॉ.संध्या 'राज' मेहता
              मीरा रोड
















  

Monday, April 27, 2020

मुक्तक


माना रात घनी अँधेरी है
सपनों की अब बारी है ।

सपने देखना जरूरी है ,
बिन सपने जिंदगी अधूरी है ।
अँधेरी रात है, पर कुछ बात है,
देती नव  सपनों की सौगात है।

दिन के उजाले में सपने पूरा करना,
चाहे जो अंजाम हो  डटे रहना।
कर्मशील हो,अब कुछ करना,
वरना सदा पछताते रहना।

=======================

भरी महफिल में वो  तन्हा तन्हा रहते हैं,
कोई कुछ कह न दे इसलिए डरते हैं ।
लोगों का क्या कुछ भी कह देते हैं ,
पर वो जीते जी, जीने की तमन्ना छोड़ देते हैं।

=========================

जिंदगी की धूप छाँव से ,
इस कदर वास्ता रहा हमारा।
धूप सदा लगाती डेरा,
छाँव ने जब भी किया बसेरा
मना लिया फिर छाँव को
धूप ने नित नव आँचल पसारा।
सुख - दु:ख मन के मीत हैं,
 इनमें रमना ही जीवन - सहारा।


==============
दिल चाहे टूटा हो ,
सब पर गुस्सा छोड़ो
दिल  को सबसे जोड़ो।
अपने तो अपने हैं
उनसे माफी दो- लो।
पहले खुद को देखो
फिर दूसरों को तोलो।

===============

एक पल को हम खुश क्या हुए,
मानो रूठ गए गम से,
मनाकर फिर ले आए हमें,
बोले- हम तन्हा क्यों रहें,
चन्द बातें कर लें तुमसे।
================
डॉ.संध्या राज मेहता
मीरारोड

कोरोना और महावीर जयंती


घर - घर पहुँचे यह शांति सन्देश
महावीर का यह अद्भुत देश,
यहां न फैले कोई भी विद्वेष
जन जन का मिटे हर क्लेश।

 सब जीव साता में लगे रहने,
जब इंसान घर में  लगे ठहरने ।
 मदद करने वाले हाथ दिखने लगे,
गद्दारों के मुँह पर ताले लगे।

2020 का  बनेगा यह  अद्भूत साल ,
नए युग का आरम्भ है यह बवाल।
देश में एकता व अखण्डता की मिसाल,
जताई सबने,, जलाकर ज्योत - मशाल।


करना होगा अब एक और एलान,
भूखा न सोएगा कोई भी इंसान।
 चाहे एक वक्त  खाना खाएंगे,
 पर भूखे को भोजन कराएंगे।

-डॉ. संध्या राज मेहता

Wednesday, April 8, 2020

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ।

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ

बेटियों से न डर ए इंसान
बेटियाँ  हैं ईश्वर का वरदान।

किसी जीव की हत्या पाप है,
पर भ्रूण हत्या तो महापाप है।
वह जीवन जो तुम्हारा ही अंश है,
स्व- कोख में पनपा खुद का वंश है।

उसे मारने की इच्छा भी सर्प-दंश है,
शायद मानव दानव का अपभ्रंश है।
यदि दानव बन किया यह कार्य,
तो अब प्रायश्चित भी हो स्वीकार्य।

दृढ़ निश्चय है , प्रतिज्ञा है , शपथ है,
सदा बेटियों को पढ़ाने का प्रण है।
शिक्षा और संस्कारों का रोपण दे, 
हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने का संकल्प है

बेटियों का बहुत हुआ संहार ,
अब न किसी से डरना है।
बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ,
 केवल नारा नहीं ,सत्य करना है।

-डॉ.संध्या 'राज' मेहता
मीरारोड़
2019 

वीर सिपाही

मीरारोड के वीर सिपाही  बेटे शहीद मेजर कौस्तुभ राणा  को 
                                      श्रृद्धांजलि सह समर्पित    

            
हम भारत के वीर सिपाही
शांति हमारा नारा है।
अगर कोई हमसे लड़ना चाहे
सम्मान हमें भी प्यारा है।

गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर

आज हम सब प्रण करते हैं।
कैसी भी ताकत आ जाए,
दुश्मन से ना हम डरते हैं।

हम भारत के वीर सिपाही

शांति हमारा नारा है।

झूठ किसी की नहीं सुनेंगे

झूठ किसी से नहीं कहेंगे।
गाली का जवाब ,
गोली से हम देंगे।

हम भारत के वीर सिपाही

शांति हमारा नारा है।

देश के दुश्मन आतंक फैलाकर

आज जब भी तंग करते हैं, 
सीना ताने वीर सिपाही
सदा उनसे जंग लड़ते हैं।

हम भारत के वीर सिपाही

शांति हमारा नारा है। 

हमलावर ,खौफनाक आतंकवादी

जब गोलियों की बौछार करते हैं।
घायल सीना, शरीर छलनी, फिर भी  
कौस्तुभ  राणा से वीर कब थमते हैं।

हम भारत के वीर सिपाही

शांति हमारा नारा है।

अमर रहे हर वीर सिपाही

जो मातृभूमि पर तन मन वारे,
मात पिता की आंखों के तारे
याद रखेंगे भारतवासी सारे।

हम भारत के वीर सिपाही

शांति हमारा नारा है।

डॉ.संध्या  'राज' मेहता

2019 

Tuesday, April 7, 2020

प्यार का पहला अहसास



पहली बार  कुछ ऐसा हो गया ,
मन मानो बरसाती हो गया।

खुला आसमां सिमटकर एक रंगीन कोना हो गया।
प्यार में मन का कोना- कोना शर्मिला हो गया।
पहली  बार  ....

जीवन में कई रंग रंगीन हो गए ,
प्यार का पहला रंग इंद्रधनुषी हो गया।

पहली बार कुछ ऐसा हो गया,
मन मानो बरसाती हो गया।

मूंदे नयन भी छलकाए प्यार,
अधर खुले, पर जुबां का द्वार बंद हो गया।
पहली

चेहरे ने पढ़ दिए सब दिल के छंद,
अनकही जुबाँ को शर्मीली अँखियों ने बता दिया।

पहली बार कुछ ऐसा हो गया,
मन मानो बरसाती हो गया।

 नैनों में छिपा प्यार गहरा ,प्यार से निखरा चेहरा
प्यार ने जीवन बगिया को महका-महका दिया ।
पहली बार  ........

अलसाई अल्हड़ शर्मीली अँखियाँ इठलाने लगी,
खुश होकर झुकी पलकों ने  दिल का हाल  सुना दिया।

पहली बार कुछ ऐसा हो गया,
मन मानो बरसाती हो गया।

प्यार की अनछुई अनुभूति होले से छू गई।
उल्लसित मन की किरणों ने विकसित यौवन को प्रस्फुटित  कर दिया।

पहली बार कुछ ऐसा हो गया,
मन मानो बरसाती हो गया।

गुलाबी सी  रतियाँ छुई मुई सी हुई बतियाँ
अधरों की चमक ने प्यार को लाली बना दिया। .
पहली बार  ........

केसरिया हुई धड़कन कई सपने बुन गई।
गालों की रौनक ने प्यार को चुम लिया।

पहली बार कुछ ऐसा हो गया,
मन मानो बरसाती हो गया।

प्यार का रूबरूअहसास शर्मिला मन करने लगा ,
प्यार का स्पर्श तन-मन को भा गया।
पहली बार  ......

प्यार की पहली बौछार तन को छूने  लगी ,
सौंधी खुशबू ने मन को सरोबार कर दिया।

पहली बार कुछ ऐसा हो गया,
मन मानो बरसाती हो गया।

डॉ. संध्या राज मेहता
मीरारोड़ ,मुम्बई
15/12/2018
नीमच,म.प्र.

अंगदान -महादान

Poem written and recited by Dr. Sandhya 'Raj' Mehta on Organ Donation liked by everyone.


 अंगदान - महादान 

दानी करते देखो दान
धन ने दिया ये वरदान।

 तन है पास बनो महान
अंगदान भी है महादान ।

ईश्वर का अनुपम उपहार
अनमोल अंगों का भंडार।

तन मिला स्वस्थ अपार
उसका हैअनंत उपकार।

जी भर जिया जीवन मस्त
पर अनेकों हैं सहते कष्ट।

 होगा जब जीवन अस्त
काया हो जाएगी ध्वस्त।

 मृत अंग भी हों जीवंत
इच्छा हो यह बलवंत।

ईश्वर रचना सुंदर साकार
व्यर्थ न हो उसका प्यार।

करुणा का प्रचार प्रसार,
मरणोपरांत अंगों का करार।

जग में आए हैं तो
करो कुछ ऐसे काम।

जिंदगी के बाद भी
जिंदा रहेगा नाम।

-डॉ. संध्या 'राज' मेहता
 २०१९

महावीर जन्म कल्याणक पर करोना प्रभावित विश्व को सन्देश


घर - घर पहुँचे यह शांति सन्देश
महावीर का यह अद्भुत देश,
यहां न फैले कोई भी विद्वेष
जन जन का मिटे हर क्लेश।

सब जीव साता में लगे रहने,
जब इंसान घर में  लगे ठहरने
मदद करने वाले हाथ दिखने लगे,
गद्दारों के मुँह पर ताले लगे।

देश में एकता व अखण्डता की मिसाल
जताई सबने जलाकर ज्योत - मशाल।
करना होगा अब एक और एलान
भूखा न सोएगा कोई भी इंसान।

 चाहे एक वक्त  खाना खाएंगे
 पर भूखे को भोजन कराएंगे।

-डॉ. संध्या राज मेहता
6/4/2020