Tuesday, April 7, 2020

अंगदान -महादान

Poem written and recited by Dr. Sandhya 'Raj' Mehta on Organ Donation liked by everyone.


 अंगदान - महादान 

दानी करते देखो दान
धन ने दिया ये वरदान।

 तन है पास बनो महान
अंगदान भी है महादान ।

ईश्वर का अनुपम उपहार
अनमोल अंगों का भंडार।

तन मिला स्वस्थ अपार
उसका हैअनंत उपकार।

जी भर जिया जीवन मस्त
पर अनेकों हैं सहते कष्ट।

 होगा जब जीवन अस्त
काया हो जाएगी ध्वस्त।

 मृत अंग भी हों जीवंत
इच्छा हो यह बलवंत।

ईश्वर रचना सुंदर साकार
व्यर्थ न हो उसका प्यार।

करुणा का प्रचार प्रसार,
मरणोपरांत अंगों का करार।

जग में आए हैं तो
करो कुछ ऐसे काम।

जिंदगी के बाद भी
जिंदा रहेगा नाम।

-डॉ. संध्या 'राज' मेहता
 २०१९

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